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जैव विकास सिद्धांत (Principles of Biological Development)

जैव विकास के सम्बन्ध में अनेक सिद्धांत दिए गए है, जिनमें लामार्कवाद, डार्विनवाद एवं उत्परिवर्तनवाद प्रमुख हैं। 

 

लामार्कवाद (Lamarckism)

  • लामार्क का सिद्धांत 1809 में Philosophic Zoologique नामक उनकी पुस्तक में प्रकाशित हुआ था।

  • लामार्कवाद के अनुसार जीवों एवं इनके अंगों में सतत बड़े होते रहने की प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है।

  • इसे "अंगों के कम या अधिक उपयोग का सिद्धांत" भी कहते हैं। 

  • इसके अनुसार जीवों द्वारा उपार्जित लक्षणों की वंशागति होती है, फलस्वरूप नयी - नयी जातियाँ बन जाती है, जैसे - जिराफ की गर्दन का लम्बा होना। 

  • अगस्त बीजमैन नामक जर्मन वैज्ञानिक ने 1886 में उपार्जित गुण की वंशागति के विरुद्ध जननद्रव्य की निरंतरता का सिद्धांत (Continuity of Germplasm) का सिद्धांत देकर लामार्कबाद का विरोध किया। 

 

डार्विनवाद (Darwinism)

  • चार्ल्स डार्विन का जन्म 12 फरवरी, 1809 में इंग्लैंड के श्रूसबारी नामक स्थान पर हुआ था।

  • 27 दिसंबर 1831 से 1836 तक इन्होने H.M.S विगल नाम जहाज के द्वारा अटलांटिक महासागर के अनेक द्वीपों, दक्षिणी अमेरिका के कुछ द्वीप और गैलापोगास द्वीपों का भ्रमण कर एकत्रित तथ्यों के आधार पर प्राकृतिक चुनाववाद (Natural Selection) नामक सिद्धांत का प्रतिपादन किया। 

  • इनके सिद्धांत की प्रमुख  बातें निम्नवत हैं:- 

  1. जंतुओं में सन्तानोपत्ति की प्रचुर क्षमता।

  2. जीवों की संख्या में स्थिरता अथवा आवास और आधार के साधन सिमित। 

  3. जीवन संघर्ष (Struggle for existence) वंशगत होने वाली भिन्नताएं (Variations with Heredity)

  4. योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the Fittest)

  5. वातावरण में परिवर्तन (Change in Environment)

 

  • समुद्रयात्रा के दौरान डार्विन ने गैलापोगस द्वीप के जीव - जंतुओं (Flora - Fauna) का अध्ययन कर 20 प्रकार के पक्षियों को निरिक्षण किया तथा उनका नाम उन्होंने डार्विन फिन्चेस  (Darwin's Finches) नाम दिया। 

  • किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में उपस्थित जंतुओं की आबादी को Fauna (फौना) एवं पौधों की आबादी को Flora (फ़्लोरा) कहा जाता है। 

 

उत्परिवर्तन (Theory of Mutation)

  • बिना किस पूर्व सुचना के वर्तमान जाती में उपस्थित वैसे परिवर्तन जो जीवों के लक्षणों में अचानक उत्पन्न हो जाता है, उत्परिवर्तन (Mutation) कहलाता है।

  • उत्परिवर्तनवाद के प्रतिपादक हॉलैण्ड के वनस्पतिशास्त्री ह्यूगो डी ब्रीज (Hugo De Vries) थे।

  • इन्होनें अपने प्रयोग के लिए ओनोथ्रा लामारकीयाना नामक पौधे को चुना था। 

  • उत्परिवर्तन  दो प्रकार का होता है :- प्राकृतिक एवं प्रेरित उत्परिवर्तन 

  • गुणसूत्रों की संख्या में पुरे हैप्लोयड सेट की कमी या वृद्धि को इयूपलॉयडि (Euploidy) तथा गुणसूत्र की सामान्य संख्या में एक या दो की कमी या वृद्धि एन्यूप्लॉयटि कहलाता है।

  • वैसे पदार्थ जो उत्परिवर्तन लाने में सहायक होते हैं उत्परिवर्तक (Mutagens)  कहलाते हैं।