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भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ

  • मूल संविधान में अनुसूचियों की संख्या 8 थीं।

  • 1951 के बाद संविधान संशोधन अधिनियमों के द्वरा विभिन्न काल खंडों में 4 और अनुसूचियों के जोड़े जाने पर वर्तमान में संविधान में अनुसूचियों की संख्या 12 हो गयी है ।

 

प्रथम अनुसूची :-

  • इस अनुसूची में भारतीय राज्य संघ में 28 राज्य और 8 संघ शासित या केंद्र शासित प्रदेशों का उल्लेख मिलता है।

भारत के 28 राज्य घटक :- 

केरल, त्रिपुरा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, मणिपुर, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, असम, सिक्किम, तमिलनाडु, नागालैंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, गोवा, छत्तीसगढ़, उत्तरांचल, झारखण्ड, तेलंगाना

 

भारत के 8 संघ शासित क्षेत्र :-

दिल्ली, लक्षद्वीप, दमन दीव और दादर व नागर हवेली, पुदुचेरी, चंडीगढ़, अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह , जम्मू कश्मीर, लद्दाख।

द्वितीय अनुसूची:-

  • इस अनुसूची में भारतीय राज व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों जैसे - राष्ट्रपति, राजयपाल, लोकसभा अध्यक्ष, राज्य सभा का सभापति व् उपसभापति, विधान सभा अध्यक्ष व् उपाध्यक्ष, विधान परिषद् के सभापति, उच्चतम और उच्च न्यायालय के न्यायधीशों और  भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक आदि को प्राप्त होने वाले वेतन, भत्तों व् पेंशन आदि का उल्लेख है। 

 

तृतीय अनुसूची :-

  • इस अनुसूची में भारतीय राज व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों जैसे - राष्ट्रपति, राजयपाल, उच्चतम और उच्च न्यायालय के न्यायधीशों और  भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक आदि  द्वारा पद ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख है।

 

चतुर्थी अनुसूची:-

  • इस  अनुसूची में विभिन्न राज्यों और संघीय क्षेत्रों की राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है। 

 

पांचवी अनुसूची:-

  • इसमें विभिन्न  अनुसूचित खेत्रों और अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के समबन्ध में प्रावधान का उल्लेख है। 

 

छठी अनुसूची:-

  • इस अनुसूची में मिजोरम, त्रिपुरा, असम और मेघालय के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के सम्बन्ध में प्रावधान उल्लेखित है। 

 

सातवीं अनुसूची:-

  • इस अनुसूची में केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति के बंटवारे के विषय उल्लेखित है।

  • इसके अंतर्गत तीन सूचियां है, जो निम्नलिखित है :-

 

A) संघ सूचि (Union List):-

  • इस सूचि में दिए गए विषय है :- रक्षा, विदेश सम्बन्ध, सशत्र बल, रेलवे, विदेशी कर्ज, नागरिकता, सिमा - शुल्क, खान एवं खनिज, बैंकिंग, मुद्रा, आंतरिक सुरक्षा, वायु एवं समुद्री मार्ग इत्यादि।

  • इन विषयों पर नियम या कानून बनाने का काम केंद्र सरकार का है।

  • संविधान के लागु होने तक इस अनुसूची में 97 विषय था वर्त्तमान में इसमें विषयों की संख्या 100 है। 

 

B) राज्य सूचि (State List):-

  • इस सूचि में दिए गए विषय हैं :- स्थानीय शासन, कृषि वन, पुलिस, जेल, लोक व्यवस्था, सड़क, पुल, अंतर्देशीय जलमार्ग, बिक्री कर इत्यादि। 

  • किसी विषय के राष्ट्र हित से जुड़े होने पर केंद्र सरकार भी कानून बना सकती है।

  • संविधान के लागू होने तक इसमें विषयों की संख्या 66 थी परन्तु वर्तमान में इसमें 61 है। 

 

C) संघ सूचि (Concurrent List):-

  • इस सूचि में दिए विषयों पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही कानून  बना सकती है।

  • केंद्र सरकार के किसी विषय पर कानून बनाने पर उसी सरकार द्वारा बनाया गया कानून निरस्त या समाप्त माना जाता है।

  • इस सूचि से सम्बंधित विषय है :- दण्ड विधि या दण्ड प्रक्रिया संहिता, विवाह एवं विवाह विच्छेद, परिवार नियोजन, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, जनसख्या नियंत्रण, सिविल प्रक्रिया संहिता, पशुओं के प्रति क्रूरता इत्यादि।

  • संविधान के लागु होने समय इस में विषयों की संख्या 47 थी जो वर्तमान में बढ़कर 52 हो गयी है। 

  • Note :- जो विषय इन तीन सूचियों में नहीं आते हैं, वैसे अवशिष्ट या बचे हुए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को दिया गया है। 

 

आठवीं अनुसूची :-

  • इसमें भारत के 22 भाषाओं का उल्लेख मिलता है। 

  • शुरुआत में आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएं थीं।

  • 1967 ई. में सिंधी को जोड़ा गया।

  • 1992 ई. में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को जोड़ा गया।

  • 2004 ई. में (92 वां संविधान संशोधन, 2003 के तहत)  मैथिलि, संथाली, डोगरी और बोडो को इस अनुसूची में जोड़ा गया। 

 

नौवीं अनुसूची :-

  • प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 ई. के द्वारा संविधान में जोड़े गए इस अनुसूची में राज्य द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण की विधियों का उल्लेख है।

  • इस अनुसूची में 284 अधिनियम हैं, जिन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।

  • पर 11 जनवरी 2007 ई संविधान पीठ ने व्यवस्था दी थी की इनमे से किसी भी कानून के द्वारा किसी भी व्यक्ति विशेष के मौलिक अधिकार का उललंघन होता है, तो उच्चतम न्यायालय में उस कानून को चुनौती दी जा सकती है, जिसकी समीक्षा उच्चतम न्यायालय कर सकती है। 

 

दसवीं अनुसूची:-

  • संविधान संशोधन अधिनियम 1985 के द्वारा संविधान में जोड़े गए इस अनुसूची में दल - बदल से सम्बंधित प्रावधानों का विवरण दिया गया है। 

 

ग्यारहवीं अनुसूची:-

  • 1993 में 73 वें संवैधानिक संसोधन के द्वारा जोड़े गए इस अनुसूची में "पंचायती राज" स्नस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया है।

  • इन संस्थाओं को 29 विषय प्रदान किये गए हैं। 

 

बारहवीं अनुसूची :-

  • इस अनुसूची में शहर में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देते हुए 18 कार्य क्षेत्र के विषय निश्चित किये गए। 

  • यह अनुसूची 1993 में 74 वें संवैधानिक संसोधन के द्वारा जोड़ी गयी है। 

संघ और उसका राज्य क्षेत्र

अनुच्छेद 1

  • भारत अथवा इंडिया राज्यों का संघ होगा।

  • राज्य व उनके राज्यक्षेत्र वही होंगे जो प्रथम अनुसूची में वर्णित हैं।

  • भारत के राज्य क्षेत्र में में अर्जित किये गए अन्य राज्य क्षेत्र समाविष्ट होंगे। 

 

अनुच्छेद 2

  • संसद को नए राज्य का प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्रदान है। 

 

अनुच्छेद 3

  • संसद को अधिकार दिया गया है की सामान्य बहुमत व् विधायी प्रक्रिया द्वारा नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन कर सकती है। 

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