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मौर्योत्तर कल / ब्राह्मण साम्राज्य 

ब्राह्मण साम्राज्य के अंतर्गत शुंग, कण्व तथा आंध्र सातवाहन आदि वंशों का उदय हुआ जिन्होनें लम्बे समय तक शासन किया। 

शुंग वंश 

  • पुष्यमित्र शुंग जो ब्राह्मण जाती का था, अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ का सेनापति था। 

  • बृहद्रथ की हत्या पुष्यमित्र शुंग ने ही की थी। 

  • पुष्यमित्र शुंग ने ही मगध पर "ब्राह्मण साम्राज्य" की स्थापना की थी। 

  • शुंग वंश का शासनकाल 185 ई पू से 73 ई पू है। 

  • शुंग शासकों ने अपनी राजधानी विदिशा में स्थापित की थी। 

  • पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल की प्रमुख घटना "विदर्भ से युद्ध" थी। 

  • इन्डो - यूनानी शासक "मिनांडर" को पुष्यमित्र शुंग ने युद्ध में पराजित कर दिया था। 

  • पुष्यमित्र शुंग ने "महर्षि पतंजलि" के माध्यम से अपने राज्य में दो बार "अश्वमेघ यज्ञ" करवाया था।

  • पुष्यमित्र शुंग ने "भरहुत स्तूप" का निर्माण करवाया था। 

  • पुष्यमित्र शुंग ने 36 वर्षों तक सफतलापूर्वक शासन किया था। 

  • पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल में ही "रामायण", "महाभारत" तथा "मनुस्मृति" की रचना हुई थी। 

  •  पुष्यमित्र शुंग का पुत्र "अग्निमित्र" विदिशा का शासक था। 

  • "यञसेन" विदर्भ का शासक था, जिसने मौर्य साम्राज्य का अंत होने पर स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया था। 

  • पुष्यमित्र शुंग ने अपने पुत्र "अग्निमित्र" को यञसेन पर आक्रमण करने विदर्भ भेजा था। 

  • अग्निमित्र ने यञसेन के चचेरे भाई "माधवसेन" को अपनी ओर मिला लिया और विदर्भ पर आक्रमण कर यञसेन को पराजित किया था। 

  • विदर्भा राज्य को यञसेन और माधवसेन ने आपस में बाँट लिया। 

  • दोनों ने ही पुष्यमित्र की आधीनता  स्वीकार कर ली थी। 

  • पुष्यमित्र ने अपने शासनकाल में यवनों का डट कर सामना किया। 

  • पुष्यमित्र ने ही यवनों को मध्यप्रदेश से खदेड़कर सिंधु के किनारे तक खदेड़ डाला था। 

  • शुंग वंश का नौवां राजा "भागवत" था। 

  • भागवत के शासन काल में ही तक्षिला के एवं राजा "एण्टियलकीड्स" का राजदूत "हेलियोडोरस" शुंग राजदरबार में आया था। 

  • शुंग वंश एक दसवां और अंतिम राजा "देवभूति" था जिसकी हत्या 73 ई पू में "वासुदेव कण्व" ने कर दी थी और इसी के साथ ही कण्व वंश की स्थापना हुई थी। 

कण्व वंश 

  • वासुदेव कण्व ने 73 ई पू ने मगध पर "कण्व वंश" की स्थापना की थी। 

  • कण्व वंश का शासन मगध पर 45 वर्षों तक रहा था। 

  • कण्व वंश के चार शासकों  ने मगध पर शासन किया था। 

  • वासुदेव कण्व ने 9 वर्ष, भूमिपुत्र ने 14 वर्ष, नारायण कण्व ने 12 वर्ष और सुशर्मा कण्व ने 10 वर्षों तक मगध पर शासन किया था। 

  • सुशर्मा कण्व वंश का अंतिम शासक था। 

  • सुशर्मा की हत्या उसके सेनापति "शिमुक" ने 60 ई पू में कर के मगध की गद्दी पर "सातवाहन वंश" की स्थापना की थी।  

सातवाहन वंश 

  • शिमुक ने 60 ई  पू  में मगध पर सातवाहन वंश की स्थापना की थी। 

  • सातवाहन वंश को "आंध्र वंश" के नाम से भी जाना जाता है। 

  • सातवाहन वंश के शासकों ने अपनी राजधानी "प्रतिष्ठान" में स्थापित की। 

  • प्रतिष्ठान "आंध्रप्रदेश" के "औरंगाबाद" जिले में स्थित है। 

  • पुराणों में सातवाहन वंश को "आंध्र भृत्य" एवं "आन्ध्रजातीय" कहा गया है। 

  • सातवाहन वंश के संस्थापक शिमुक को "सिष्टक" एवं "सिन्धुक" भी कहा जाता है। 

  • शिमुक के प्रबल प्रतिद्वंदी "शक" थे। 

  • सातवाहन वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा "गौतमीपुत्र शातकर्णि" माना जाता है। 

  • गौतमीपुत्र शातकर्णि "पश्चिम का स्वामी" नाम से भी प्रसिद्ध हैं। 

  • गौतमीपुत्र शातकर्णि ने दो "अश्वमेघ यज्ञ" और एक "राजसूय यज्ञ" का आयोजन किया था। 

  • सातवाहन वंश की भाषा "प्राकृत" और लिपि "ब्राह्मी" थी। 

  • सातवाहन वंश के प्रसिद्ध कवि व् साहित्यकार "हाल" एवं "गुणाढ्य" थे। 

  • गुणाढ्य ने "गाथा सप्तशतक" की रचना की थी। 

  • सातवाहनों का समाज "मातृसत्तात्मक" था। 

  • सातवाहन काल में चांदी, तांबे, सीसा, पोटीन और कांसे की मुद्राओं का प्रचलन था। 

  • सातवाहनों के शासकों ने 460 वर्षों तक शासन किया। 

  • ब्राह्मणों को भूमि अनुदान के रूप में देने की प्रथा की शुरुआत सर्वप्रथम सातवाहन शासकों ने ही शुरू की थी। 

  • सातवाहन काल में सुप्पारा (सोपारा) एवं कलिएन (कल्याण) सर्वाधिक प्रमुख बंदरगाह था। 

  • शासन की दृष्टि से सातवाहन साम्राज्य जनपद, अहार और गाँव में बंटा था। 

  • अहार के प्रमुख अधिकारी को "अमाच" कहा जाता था। 

सातवाहन वंश के प्रमुख शासक निम्नवत है:- 

शिमुक , शातकर्णि, गौतमी पुत्र शातकर्णि, वाशिष्ठी पुत्र, यज्ञ श्री शातकर्णि, पुलुमावी, श्री शिवखण्ड शातकर्णि।  

सातवाहन काल की महत्वपूर्ण स्थापत्य कृतियाँ निम्नवत है :-

  • अजंता एवं एलोरा की गुफाओं का निर्माण। 

  • कार्ले का चैत्य। 

  • अमरावती कला का विकास। 

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