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 कार्य, शक्ति और ऊर्जा 

कार्य (Work)

  • बल और बल के अनुप्रयुक्त बिंदु द्वारा बल  की  दिशा में तय की गयी दुरी के गुणनफल को बल के द्वारा किया गया कार्य कहा जाता है। 

  • अर्थात - कार्य = बल x विस्थापन  या W = F. S 

  • कार्य एक अदिश राशि है। 

  • इसका SI मात्रक जूल  होता है। 

  • यदि बल F तथा विस्थापन S के मध्य θ कोण बनता है तो, - W = F S Cos θ

ऊर्जा (Energy) 

  • कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। 

  • ऊर्जा एक अदिश राशि है। 

  • इसका SI मात्रक जूल होता है। 

  • ऊर्जा दो प्रकार की होती है :-  गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) और स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)

  • किस वस्तु की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा गतिज ऊर्जा कहलाती है। 

  • इसे KE से दर्शाते हैं। 

  • KE  = 1 / 2 mv    

  • गतिज ऊर्जा के कुछ उदाहरण निम्न हैं :- 

  1. बन्दुक से छोड़ी गयी गोली। 

  2. धनुष से छोड़ा गया तीर। 

  3. गिरती वर्षा की बूंदें। 

  4. बहती हुई नदी। 

  5. नाचता हुआ लट्टू। 

स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

  • किसी वस्तु की स्थिति या आकृति में परिवर्तन के कारण जो ऊर्जा होती है, स्थितिज ऊर्जा कहलाती है। 

  • इसे PE से दर्शाते हैं। 

  • PE = mgh 

  • स्थितिज ऊर्जा के कुछ उदाहरण निम्न हैं:- 

  1. बाँध बनाकर एकत्रित जल की ऊर्जा। 

  2. घडी की  चाभी में संचित ऊर्जा। 

  3. तानी हुई स्प्रिंग या कमानी की ऊर्जा 

ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत (Law of Conservation of Energy)

ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट, उसे सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। 

ऊर्जा का रूपान्तरण करने वाले कुछ उपकरण  निम्न हैं:- 

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शक्ति (Power)

किसी कर्ता द्वारा प्रति इकाई समय में किये गए कार्य को  उसकी शक्ति कहते हैं। अर्थात कार्य करने की दर को शक्ति कहा जाता है। 

  • शक्ति का मात्रा वाट होता है। 

  • शक्ति = कार्य / समय  = जूल  / सेकेंड = वाट  

  • 1 वाट = 1 जूल  / सेकेण्ड 

  • 1 किलोवाट = 1000 वाट 

  • 1 अश्व शक्ति = 746 वाट