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 तरंग गति (Wave Motion) 

 तरंग गति (Wave Motion) 

 

जब किसी कारक द्वारा विक्षोभ उत्पन्न करने पर कोई वस्तु गतिमान होती है, तो वस्तु की इस प्रक्रिया को ही तरंग गति कहते हैं।

 

आयाम:- दोलन करने वाली वस्तु अपनी साम्य स्थिति के किसी भी ओर जितनी अधिक से अधिक दूरी तक जाती है, उस दूरी को दोलन का आयाम कहा जाता है।

 

तरंग दैधर्य :- ऐसे दो क्रमिक कणों, जो ठीक एक ही समय में बिल्कुल एक ही रीति से दोलन करते हैं, के बीच की दूरी को तरंग दैधर्य कहलाता है।

 

  • तरंगदैधर्य को लैम्डा (λ) से सूचित करते हैं। 

  • इसका SI मात्रक मीटर (m) होता है। 

  • तरंग वेग = आवृत्ति x तरंगदैधर्य या v  = nλ

 

ध्वनि तरंगें

 

  • ध्वनि तरंगें अनुदैधर्य तरंगें होती है। 

 

अवश्रव्य ध्वनि तरंगें (Infrasonic Waves)

 

वे ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्ति 20Hz से नीचे की होती है अवश्रव्य ध्वनि तरंगें कहलाती है, इन तरंगों को मानव कान नहीं सुन सकते। 

 

श्रव्य ध्वनि तरंगें (Audible Waves) :- 

वे ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्ति 20 Hz से 20000 Hz के बीच की होती है, और जिन्हे मानव कान सुन सकते हैं श्रव्य ध्वनि तरंगें कहलाती हैं। 

 

पराश्रव्य ध्वनि तरंगें (Ultrasonic Waves):-

20000Hz से ऊपर की तरंगों को पराश्रव्य ध्वनि तरंगें कहा जाता है और मानव इन तरंगों को नहीं सुन सकते। 

 

पराश्रव्य ध्वनि तरंगों के उपयोग -

 

  • संकेत भेजने में 

  • समुद्र की गहराई का पता लगाने में 

  • कीमती कपड़ों, वायुयान तथा घड़ियों पुर्जों को साफ़ करने में 

  • कल कारखानों की चिमनियों से कालिख हटाने में 

  • दूध के अंदर के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में 

  • गठिया रोग के उपचार एवं मस्तिष्क के ट्यूमर का पता लगाने में 

 

ध्वनि का वेग (Speed of Sound)

  • विभिन्न माध्यमों में ध्वनि का वेग भिन्न होता है। 

  • किसी माध्यम में ध्वनि का वेग मुख्यतः माध्यम की प्रत्यास्थता तथा घनत्व पर निर्भर करती है। 

  • ध्वनि का वेग ठोस में सर्वाधिक, द्रव में उससे कम और गैस में सबसे कम होती है। 

  • एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर ध्वनि की चाल एवं तरंगदैधर्य बदल जाती है परन्तु आवृत्ति नहीं। 

  • किसी माध्यम में ध्वनि का वेग आवृत्ति पर निर्भर नहीं करता है। 

  • ध्वनि के वेग पर दाब का कोई प्रभाव् नहीं पड़ता है। 

  • ध्वनि के वेग माध्यम के ताप पर निर्भर करता है, माध्यम का ताप बढ़ने पर ध्वनि का वेग भी बढ़ता है। 

  • नमीयुक्त वायु का घनत्व, शुष्क वायु के घनत्व से कम होता है, अतः शुष्क वायु की अपेक्षा नमीयुक्त वायु में ध्वनि का वेग अधिक होगा। 

 

ध्वनि के लक्षण 

 

ध्वनि के तीन लक्षण होते हैं -

  1. तीव्रता (Intensity)

  2. तारत्व  (Pitch)

  3. गुणंता (Quality)

 

तीव्रता (Intensity)

  • इसी के कारण ध्वनि तीव्र या धीमी सुनाई देती है। 

  • ध्वनि तीव्रता का SI मात्रक माइक्रोवाट प्रति वर्ग मीटर होता है। 

  •  तीव्रता का प्रयोगात्मक मापक बेल (Bell) होता है, जिसके दसवें भाग को डेसिबेल कहते हैं। 

  • ध्वनि की तीव्रता, स्रोत से दुरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती, आयाम के वर्ग के समानुपाती, आवृत्ति के वर्ग के समानुपाती तथा माध्यम के घनत्व के समानुपाती होता है। 

 

तारत्व (Pitch)

  • तारत्व के कारण ही ध्वनि को मोटा या पतला कहा जाता है। 

  • ध्वनि की आवृत्ति अधिक होने से तारत्व अधिक होता है, जिससे ध्वनि पतली होती है तथा आवृत्ति कम होने पर तारत्व कम  ध्वनि मोटी होती है। 

 

गुणता (Quality)

  • इसके कारण सामान प्रबलता एवं  सामान्य तारत्व की ध्वनियों में अंतर का पता चलता है। 

  • ध्वनि की गुणता संनादि स्वरों की संख्या, क्रम तथा आपेक्षिक तारत्व पर निर्भर करती है। 

 

प्रतिध्वनि (Echo)

  • किसी सतह से परावर्तन के बाद जो ध्वनि सुनाई पड़ती है उसे प्रतिध्वनि कहते हैं. 

  • प्रतिध्वनि सुनाने के लिए श्रोता को परावर्तक सतह से 17 मीटर की दुरी रेहनी चाहिए। 

  • कानों पर प्रतिध्वनि का प्रभाव 1 / 10 सेकंड तक रहता है। 

  • प्रतिध्वनि के द्वारा समुद्र की गहराई तथा वायुयान की ऊंचाई का पता चलता है। 

 

डॉप्लर प्रभाव (Dopler's Effect)

जब किसी ध्वनि स्रोत एवं श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति उसकी वास्तविक आवृत्ति से अलग सुनाई पड़ती है, इसे ही डॉप्लर प्रभाव कहा जाता है। 

मैक संख्या 

किसी माध्यम में किसी पिंड की चाल तथा उसी माध्यम में ताप एवं दाब की उन्ही परिस्तिथियों में ध्वनि की चाल के अनुपात को उस वस्तु की उस माध्यम में मैक संख्या कहते हैं। 

यदि मैक संख्या 1 से अधिक होती है तो पिंड की चाल सुपरसोनिक (पराध्वनिक) एवं यदि 5 से अधिक हो तो ध्वनि की चाल हाइपरसोनिक (अतिपराध्वनिक) कहलाती है। 

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि का वेग:- 

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