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नाभिकीय संलयन एवं विखण्डन (Nuclear Fusion and Fission)

जिस अभिक्रिया में परमाणु का नाभिक भाग लेता है उसे नाभिकीय अभिक्रिया कहते हैं। 
 

नाभिकीय अभिक्रिया दो प्रकार के होते हैं :- नाभिकीय संलयन और नाभिकीय विखण्डन 
 

नाभिकीय संलयन अभिक्रिया (Nuclear Fusion Process):- 

  • वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक हल्के नाभिक मिलकर एक भारी स्थायी नाभिक का निर्माण करते हैं, नाभिकीय संलयन अभिक्रिया कहलाता है।

  • इसे ऊष्मा नाभिकीय अभिक्रिया भी कहा जाता है। यह अभिक्रिया उच्च ताप और दाब पर संचालित होती है।

  • इस अभिक्रिया में उच्च वेग वाले प्रोटॉन आपस में मिलकर संलयित होते हैं।

  • सूर्य एवं तारों से प्राप्त ऊर्जा का स्रोत यही अभिक्रिया होती है।

  • हाइड्रोजन बम भी नाभिकीय संलयन अभिक्रिया पर ही आधारित होती है। 

 

नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया (Nuclear Fission Process):- 

  • वह अभिक्रिया जिसमें एक बड़ा नाभिक विखंडित होकर कई छोटे छोटे नाभिकों में टूट जाता है, नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया कहलाती है।

  • 1939 में जर्मन वैज्ञानिक आटोहान और स्ट्रॉस मैन ने इस अभिक्रिया के बारे में बतलाया था।

  • यह अभिक्रिया नाभिक पर मंद गति वाले न्युट्रानों के प्रहार से संपन्न होती है।

  • परमाणु बम नाभिकीय विखण्डन सिद्धांत पर ही आधारित होता है।

  • परमाणु बम के निर्माण के लिए यूरेनियम एवं प्लूटोनियम का उपयोग होता है।

  • परमाणु बम का प्रयोग सर्वप्रथम द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिका ने जापान पर किया था।

  • अमेरिका ने 06 अगस्त 1945 को हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम (नाम - लिटिल मैन) और 09 अगस्त 1945 को नागासाकी शहर पर दूसरा परमाणु बम (नाम - फ़ैट मैन) गिराया था। 

 

श्रृंखला अभिक्रिया :-

जब किसी नाभिक पर मंद गति वाले न्यूट्रॉन का प्रहार किया जाता है, तो नाभिक का विखंडन होता है और बहुत अधिक ऊर्जा भी मुक्त होती है साथ ही साथ तीन नए न्यूट्रॉन उत्पन्न होते हैं जो लगातार नाभिक को विखंडित करते रहते हैं इसी अभिक्रिया को श्रृंखला अभिक्रिया कहते हैं।

यह अभिक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक की पूरा नाभिक समाप्त नहीं हो जाता है। 
 

नियंत्रित विखंडन अभिक्रिया :-

नाभिकीय विखंडन अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न अवांछित न्यूट्रॉनों को रोककर श्रृंखला अभिक्रिया को रोकने वाली अभिक्रिया नियंत्रित विखंडन अभिक्रिया कहलाती है। 
 

परमाणु रिएक्टर :-

नियंत्रित विखंडन अभिक्रिया का उपयोग नाभिकीय ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए 02 दिसम्बर 1942 को अमेरिका में कार्यरत इटली  वैज्ञानिक एनरिको फर्मी ने नाभिकीय रिएक्टर का निर्माण  किया था। 
अवांछित न्यूट्रॉनों को रोकने के लिए रिएक्टर में मंदक के रूप में बोरॉन, कैडमियम, ग्रेफाइट या भारी जल का  उपयोग होता है। 

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