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प्रकाश (Light) - Part - 2

प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)

प्रकाश के एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाने पर दिशा परिवर्तन की क्रिया को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

 

अपवर्तन का दैनिक जीवन में उपयोग - 

1. जब प्रकाश की किरण किसी प्रकाशतः विरल माध्यम से प्रकाशतः सघन माध्यम में जाती है तो वह अविलंब की ओर मुड़ जाती है तथा सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है तोअविलम्ब से दूर हट जाती है।

2. जब प्रकाश की किरण दो माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर लम्ब पड़ती है तो बिना मुड़े सीधी निकल जाती है।

 

अपवर्तन के नियम

1. आपतित किरण, अभिलंब तथा अपवर्तित किरण तीनों एक ही समतल में स्थित होते हैं।

2. किन्ही दो माध्यमों के लिए  आपतन कोण की sine तथा अपवर्तन की sine का अनुपात एक नियतांक होता है।

 

अर्थात = sin i / sin r = µ नियतांक

  • इस नियतांक को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे  माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।

  • इस नियम को स्नेल का नियम भी कहते हैं।

  • किसी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक शून्य में प्रकाश की चाल और उस माध्यम में प्रकाश की चाल के अनुपात के बराबर होता है।

अर्थात निरपेक्ष अपवर्तनांक (µ) = शून्य में प्रकाश की चाल / उस माध्यम में प्रकाश की चाल 

 

प्रकाश के अपवर्तनांक के कारण:- 

  • द्रव में अंशतः डूबी हुई सीधी छड़ टेढ़ी दिखाई देती है। 

  • तारे टिमटिमाते दिखाई देते हैं। 

  • सूर्य उदय से पहले और सूर्यास्त के बाद भी सूर्य दिखाई देता है। 

  • जल के अंदर पड़ी हुई मछली वास्तविक गहराई से ऊपर उठी हुई दिखाई देती है। 

 

प्रकाश का पूर्ण आतंरिक परावर्तन (Total Inernal Reflection)
 

क्रांतिक कोण (Critical Angle):- 

  • सघन माध्यम में बना वो आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण का मान 90 डिग्री है। 

  • आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से बड़ा होने पर प्रकाश वायरल माध्यम  बिलकुल नहीं जाता,  बल्कि पूरा प्रकाश प्रवर्तित होकर सघन माध्यम में लौट जाता है, इसे ही पूर्ण आतंरिक परावर्तन कहते हैं। 

  • इसमें प्रकाश का अपवर्तन बिलकुल नहीं होता है, बल्कि सम्पूर्ण आपतित प्रकाश परावर्तित हो जाता है। 

  • किसी पृष्ठ के जिस भाग से पूर्ण आतंरिक परावर्तन होता है, वह चमकने लगता है। 

पूर्ण आतंरिक परावर्तन के लिए निम्न दो शर्तें आवश्यक है :- 
 

1. प्रकाश की किरण सघन माध्यम से वायरल माध्यम में जा रही हो। 
2. आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो। 

पूर्ण आतंरिक परावर्तन के कारण :-

1.  हीरा चमकता हैं।

2. रेगिस्तान में मृग मरीचिका (Mirage) बनती है।

3. कांच में बना दरार चमकता हैं।

4. जल में परखनली चमकती है।

 

प्रकाशीय तन्तु (Optical Fibres)

 

यह प्रकाश के पूर्ण आतंरिक सिद्धांत पर बनी ऐसी युक्ति है जिसके द्वारा प्रकाश सिग्नल को इसकी तीव्रता में क्षय किये बिना एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित किया जा सकता है, चाहे मार्ग कितना भी टेढ़ा - मेढ़ा क्यों न हो।

 

प्रकाशीय तन्तु के उपयोग

 

प्रकाश सिग्नलों को दूर भेजने में। विधुत सिग्नल को प्रकाश सिग्नल में बदलकर प्रेषित एवं अभिग्रहित करने में। शरीर के आतंरिक भागों के परिक्षण में।

 

प्रिज्म से अपवर्तन

  • कांच का कोई पट्ट जिसके दोनों फलक सामानांतर नहीं होते या किसी कोण पर झुके दो समतल पृष्ठों के बीच घिरे किसी पारदर्शकमाध्यम को प्रिज़्म कहते हैं।

  • जब सूर्य का प्रकाश प्रिज़्म से गुजरता है तब प्रकाश के  अपवर्तन के पश्चात निर्गत किरणें आधार की ओर मुड़ने के साथ ही साथ सात रंगों में बंट भी जाती है।  रंगों के इस समूह को वर्णक्रम (Spectrum) कहते हैं तथा इस क्रिया को वर्ण विक्षेपण कहते हैं।

 

ये साथ रंग ऊपर से निचे की ओर निम्न हैं :-

R - Red

O - Orange

Y - Yellow

G - Green

B - Blue

I - Indigo

V - Violet

"न्यूटन ने बताया था के भिन्न भिन्न रंग भिन्न भिन्न कोणों से विक्षेपित होती हैं, क्यों कि भिन्न भिन्न प्रकाश के रंगों का वेग भिन्न भिन्न होता है और किसी प्रकाश का अपवर्तनांक भी विभिन्न रंगों के लिए विभिन्न होता है"।

 

  • परावर्तन, पूर्ण परावर्तन तथा अपवर्तन द्वारा वर्ण विक्षेपण का सबसे अच्छा उदाहरण इंद्रधनुष (Rainbow) है। 


इंद्रधनुष दो प्रकार के होते हैं :- 
 

प्राथमिक इंद्रधनुष

  • जब बूंदों पर आपतित होने वाली सूर्य की किरणों का दो बार अपवर्तन व् एक बार परावर्तन होता है तो प्राथमिक इंद्रधनुष का निर्माण होता है।

  • इसमें लाल रंग बाहर तथा बैंगनी रंग भीतर की ओर होता है। 
     

द्वितीयक इंद्रधनुष

  • जब बूंदों पर आपतित होने वाली सूर्य की किरणों का दो बार अपवर्तन और दो  बार परावर्तन होता है तो प्राथमिक इंद्रधनुष का निर्माण होता है।

  • इसमें लाल रंग अंदर तथा बैंगनी रंग बाहर की ओर होता है। 

 

  • लाल प्रकाश का तरंगदैधर्य 7500 A  तथा बैंगनी प्रकाश का 4000 A होता है। 

  • A = ऐंगस्ट्रम 

 

वस्तुओं  का रंग 

  • वस्तु का रंग वस्तु द्वारा लौटाए गए प्रकाश पर निर्भर करता है। 

  • जो रंग सभी रंगों को परावर्तित कर देती है उसका रंग सफेद होता है। 

  • जो रंग  सभी रंगों को अवशोषित कर लेता है उसका रंग काला होता है। 

  • आँख की रेटिना पर स्थित शंकु कोशिका (Cone Cells) ही रंग की पहचान करता है। 

 

प्राथमिक रंग :- लाल, हरा और नीला को प्राथमिक रंग कहते हैं। 
द्वितीय रंग :- दो प्राथमिक रंगों को मिलाने से द्वितीयक रंग बनता है। 

 

जैसे :- लाल + नीला = मैजेंटा, नीला + हरा = स्यान, लाल + हरा = पीला 


सम्पूरक रंग :-

  • जब दो रंगों को मिलाने से सफ़ेद रंग प्राप्त होता है उसे सम्पूरक रंग कहते हैं। 

  • दैनिक जीवन में रंगों को मिलाने से ये क्रम प्राप्त नहीं होता है, क्यूंकि उनमें अशुद्धियाँ रहती हैं। 

  • रंगीन टेलीविजनों में प्राथमिक रंगों का प्रयोग होता है। 

विभिन्न वस्तु विभिन्न रंग डालने से निम्न रंग के दिखाई पड़ते हैं:- 

Prism spectrum.jpg