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प्रकाश (Light) - Part - 1

प्रकाश ऊर्जा (Light Energy)

  • प्रकाश ऊर्जा का एक प्रकार है, जो विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में संचरीत होता है।

  • प्रकाश की ही सहायता से हम किसी वस्तु को देख सकते हैं।

  • प्रकाश का तरंग दैद्धर्य 3900 डिग्री A se 7800 डिग्री A के बीच होता है।

  • प्रकाश एक अनूप्रस्थ तरंग का उदाहरण है क्यूं की विद्युत चुम्बकीय तरंगें अनूप्रस्थ तरंग होती है।

विद्युत चुम्बकीय तरंग प्रकाश के निम्न गुणों की व्याख्या करता है:- 

  • प्रकाश का परावर्तन, प्रकाश का अपवर्तन, सीधी रेखा में गमन, प्रकाश का विवर्तन, प्रकाश का व्यतिकरण एवम् प्रकाश का ध्रुवण इत्यादि।

  • प्रकाश की सबसे छोटी इकाई को फोटान कहा जाता है।

  • वायु तथा निर्वात में प्रकाश की चाल सबसे अधिक होती है।

  • प्रकाश की चाल माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है। जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होगा प्रकाश की चाल भी उतना ही कम होती है।

  • सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश को पहुंचने में 499 सेकंड अर्थात 8 मिनट और 19 सेकंड लगता है।

  • चन्द्रमा से परावर्तित प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में 1.28 सेकंड लगता है।

प्रकाश का विवर्तन ( Diffraction of Light)

जब प्रकाश किसी अवरोध के किनारों से थोड़ा मुड़कर उसकी छाया में प्रवेश कर जाता है तो उसे प्रकाश का विवर्तन कहा जाता है।

 

प्रकाश का प्रकीर्णन (Sacttering of Light)

जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से गुजरता है जिसमें धूल तथा अन्य पदार्थों के  अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं तक इनके द्वारा प्रकाश सभी दिशाओं मेजन प्रसारित हो जाता है। इसे ही प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।

  • बैंगनी रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे अधिक और लाल रंग के प्रकाश का सबसे कम होता है।

  • आकाश का नीला रंग प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण ही दिखाई देता है।

 

प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)

 

प्रकाश के किसी चिकने पृष्ट से टकराकर लौटने को प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।

समतल दर्पण प्रकाश के अच्छे परावर्तक होते हैं।

 

परावर्तन के दो नियम होते हैं:- 

 

1. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर डाला गया अभिलम्ब तीनों एक ही समतल पर होते हैं

2. परावर्तन कोण एवम आपतन कोण दोनों बराबर होते हैं।

 

समतल दर्पण (Plane Mirror) द्वारा प्रकाश का परावर्तन

 

  • कोई वस्तु समतल दर्पण के जितने आगे होती है, उसका प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है।

  • प्रतिबिम्ब काल्पनिक, वस्तु के बराबर एवम पार्श्व या उल्टा होता है।

  • समतल दर्पण द्वारा नियमित एवम खुरदुरी तथा रुखड़ी साथ द्वारा विसरित परावर्तन होता है।

 

गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं- 

 

1. अवतल दर्पण (Concave Mirror) :-  

  • इसे अभिसारी दर्पण भी कहते हैं।

  • इसमें प्रकाश का परावर्तन दर्पण के भीतरी सतह से होता है।

2. उत्तल दर्पण (Convex Mirror)

  • इसे अपसारी दर्पण भी कहते हैं।

  • इसमें प्रकाश का परावर्तन दर्पण के बाहरी सतह से होता है।

 

अवतल दर्पण के उपयोग -

  • हजामती दर्पण के रूप में ।

  • रोगियों के नाक, कान, गले, दांत इत्यादि की जांच के लिए डॉक्टरों द्वारा।

  • गाड़ी के सर्च लाइट एवम हेडलाइट में।

  • सोलर कुकर में।

 

उत्तल दर्पणों का उपयोग - 

  • वाहनों के साइड मिरर में।

  • सड़क की बत्तियों के शीशे के रूप में।

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