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विधुत धारा (Electric Current)

  • किसी चालक पदार्थ में किसी दिशा में दो बिंदुओं के बीच आवेश का जो प्रवाह होता है, उसे विधुत धारा (Electric Current) कहते हैं। 

  • इसका SI मात्रक एम्पियर होता है।  

  • एक एक अदिश राशि है। 

 

एक एम्पियर विधुत धारा:-

एक एम्पियर विधुत धारा प्रवाहित होने का अर्थ है उस तार में प्रति सेकंड  6. 25 x 10  इलेक्ट्रॉन एक सिरे से प्रविष्ट होते हैं तथा इतने ही इलेक्ट्रॉन दूसरे सिरे से बाहर निकल जाते हैं। 


प्रतिरोध:-  
किसी चालक में विधुत धारा के प्रवाहित होने पर चालक के परमाणुओं तथा अन्य कारकों द्वारा उत्पन्न व्यवधान को चालाक का प्रतिरोध कहते हैं। इसका SI मात्रक ओम (Ω) होता है। 

 

ओम का नियम :-

चालक से प्रवाहित धारा का प्राबल्य उसके सिरों के बीच के विभवांतर का समानुपाती होता है। 
 

ओमीय प्रतिरोध :-  

जो चालक ओम के नियम का पालन करता है, उसके प्रतिरोध को ओमीय प्रतिरोध  कहते हैं।  जैसे:- मैगनीज का तार। 
 

अन ओमीय प्रतिरोध :-

जो चालक ओम के नियम का पालन नहीं करता है, उसका प्रतिरोध अन ओमीय प्रतिरोध कहलाता है। जैसे :- डायोड बल्ब का प्रतिरोध और ट्रायोड बल्ब का प्रतिरोध 
 

विशिस्ट प्रतिरोध :-

किसी चालक पदार्थ के एक मीटर भुजा वाले धन के सामने के फलकों के बीच विधुत प्रतिरोध को उस पदार्थ का विशिस्ट प्रतिरोध कहते हैं।  

इसका SI मात्रक ओम मीटर या महो (Mho) होता है। 
 

प्रतिरोधों का संयोजन :- 
सामान्यतः प्रतिरोधों का समूहन दो प्रकार से होता है - 
I. श्रेणी क्रम ii. समानांतर क्रम 

 

श्रेणी क्रम में संयोजित प्रतिरोधों का समतुल्य प्रतिरोध समस्त प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है। 
 

समानांतर क्रम में संयोजित प्रतिरोधों के समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम उनके प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है। 
 

विधुत शक्ति :-

विधुत परिपथ में ऊर्जा के क्षय होने की दर को विधुत शक्ति कहते हैं। इसका SI मात्रक वाट होता है। 
 

अमीटर :-

  • विधुत धारा को एम्पियर में मापने के लिए अमीटर का प्रयोग होता है। 

  • एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है। 

 

वोल्ट्मीटर :-

  • विधुत  परिपथ में दो बिंदुओं के बीच उत्पन्न विभवांतर को  मापने  के लिए प्रयोग में लाया गया यंत्र वोल्ट्मीटर कहलाता है। 

  • वोल्ट्मीटर हमेशा समानांतर क्रम में लगाया जाता है। 

  • एक आदर्श वोल्ट्मीटर का प्रतिरोध अनंन्त होता है। 

विधुत फ्यूज :-

  • विधुत परिपथ में लगे उपकरणों की सुरक्षा के लिए जस्ता या ताम्बा, टीन व् सीसा के बने मिश्र धातु का तार लगाया जाता है, जिसे फ्यूज कहते हैं। 

  • इसका समूहन हमेशा श्रेणी क्रम में होता है। 

  • इसका गलनांक कम होता है। 

 

गैल्वेनोमीटर :-

विधुत परिपथ में विधुत धारा की उपस्तिथि को बताने वाले यंत्र को गैल्वेनोमीटर कहते हैं। 
 

ट्रांसफॉर्मर:-

  • यह एक ऐसा यंत्र है जो उच्च A. C. voltage को निम्न में और निम्न A. C. voltage को उच्च में बदल देता है। 

  • यह विधुत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। 

  • यह केवल A. C. के लिए प्रयुक्त होता है। 

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