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तत्वों के आवर्ती वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements)

 तत्वों कर आवर्ती वर्गीकरण का प्रयास कई वैज्ञानिकों ने किया था वे हैं:- 

1. डोबेरेनॉर का त्रिक सिद्धान्त - 1827

2. ड्यूमा का प्रयास - 1853

3. न्यूलैंडस का अष्टक नियम - 1866

 

  • उपर्युक्त वैज्ञानिकों के असफल हो जाने के बाद 1869 में रूसी वैज्ञानिक मेंडलीफ ने सफल प्रयास किया, जिसे "मेंडलीफ का आवर्त नियम" कहते हैं।

  • मेंडलीफ के आवर्त नियम के अनुसार " तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं"।

  • मेंडलीफ की आवर्त सारणी में 9 वर्ग और 7 आवर्त होते हैं।

  • आवर्त सारणी में क्षैतिज कतारों को आवर्त और उदग्र कतारों को वर्ग कहते हैं।

 

मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोष - 

  1. हाइड्रोजन को क्षार, धातु एवम हैलोजन जैसे दोहरे व्यवहार के कारण दोनों वर्ग में रखा गया।

  2. दुष्प्राप्य मृदा तत्वों लैन्थेनाइड्स और ऐक्टिनाइड्स का स्थान निश्चित नही है।

  3. अधिक परमाणु भार वाले तत्वों को कम परमाणु भार वाले तत्वों से पहले रखना। जैसे - टेलयुरियम (127.6) एवम आयोडीन (126.92)

  4. निकेल (58.6) एवम कोबाल्ट (58.9)।

  5. समान गुण वाले तत्वों को अलग अलग रखना। जैसे - Cu और Hg, Ag और  Ti, Au और Pt 

  6. समस्थानिकों के लिए स्थान निर्धारित नही होना।

  7. 8वें वर्ग में तीन तत्वों को एक साथ रखा जाना।

आधुनिक आवर्त सारणी

  • आधुनिक आवर्त सारणी का निर्माण मोसले ने 1913 में किया था।

  • मोसले के आवर्त नियम के अनुसार " तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण तत्वों के परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं" ।

  • आधुनिक आवर्त सारणी में भी 9 वर्ग और 7 आवर्त हैं।

  • वर्ग I से लेकर के VII तक को A एवम B उपवर्ग में बांटा गया। इस प्रकार उपवर्गों को मिलाकर वर्गों की कुल संख्या कुल 18 हैं।

 

तत्वों के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी को निम्नलिखित चार वर्गों में बांटा गया है - 

  •  s - ब्लॉक के तत्व: वर्ग IA से IIA वर्गों के तत्व s ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

  • जिनका अंतिम इलेक्ट्रॉन s - सब सेल पर समाप्त होता है।

  • p - ब्लॉक के तत्व: IIIA से VIIA के तत्व p - ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

  • जिनका अंतिम इलेक्ट्रॉन p - सब सेल पर समाप्त होता है।

  • s एवम p ब्लॉक के तत्व सामान्य तत्व कहलाते है।

  • d - ब्लॉक के तत्व: IB से VIIB एवम VII वर्ग के तत्व d - ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

  • जिनका अंतिम इलेक्ट्रॉन d - सब सेल पर समाप्त होता है।

  • d - ब्लॉक के तत्व संक्रमण तत्व (Transition Elements) कहलाते हैं।

  • f - ब्लॉक के तत्व: f ब्लॉक के आवर्त सारणी के नीचे स्थित लैन्थेनाइड्स एवम ऐक्टिनाइड्स f - ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

  • जिनका अंतिम इलेक्ट्रान f - सब सेल पर समाप्त होता है।

  • f - ब्लॉक के तत्व दुर्लभ ( Rare Elements) कहलाते हैं।

 

आयनन विभव (Ionisational Potential):- 

ऊर्जा की वह न्यूनतम मात्रा उस तत्व के एक गैसीय परमाणु की बाह्यतम कक्षा के एक इलेक्ट्रान को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है, आयनन विभव कहलाता है।

 

इलेक्ट्रान बंधुता (Electron Affinity):-

किसी उदासीन गैसीय परमाणु की बाह्यतम कक्षा में बाहर से एक इलेक्ट्रान ग्रहण करने के लिए कितनी ऊर्जा मुक्त होती है उसे इलेक्ट्रान बंधुता कहते हैं।

  • वर्ग VII के तत्वों की इलेक्ट्रान बंधुता उच्च होती है।

  • सबसे अधिक इलेक्ट्रान बंधुता क्लोरीन की होती है।

  • विधुत ऋणात्मकता ( Electronegativity):- किसी  तत्व की परमाणु की वह क्षमता, जिसके सहारे वह साझे की इलेक्ट्रान जोड़ी को अपनी ओर खींचती है, विधुत ऋणात्मकता कहलाती है।

  • फ़्लोरिन की विधुत ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है।

  • वर्ग IX के तत्व निष्क्रिय गैस (Nobel Gas) कहलाते हैं।

  • जैसे :- He, Ne, Ar, Kr, Xe एवम Rn

  • इस वर्ग को शून्य वर्ग भी कहते हैं। निष्क्रिय गैसों का गलनांक निम्न होता है तथा वर्ग IV के तत्वों का गलनांक उच्च होता है।