google.com, pub-3332830520306836, DIRECT, f08c47fec0942fa0

 ब्राह्मणेतर साहित्य

 ब्राह्मणेतर साहित्य  को दो भागों में बांटा जाता है :- 1. बौद्ध साहित्य और 2. जैन साहित्य 

बौद्ध साहित्य (Buddhist literature)

  • बौद्ध ग्रंथों में सबसे प्राचीन ग्रंथ "त्रिपिटक" है। 

  • त्रिपिटक इन तीन ग्रंथों से मिलकर बनता है :- 1. सुत्तपिटक 2. विनय पिटक और 3. अभिधम्म पिटक

  • महात्माबुद्ध के धार्मिक विचारों और उपदेशों का सार संग्रह "सुत्तपिटक" में मिलता है। 

  • "सुत्तपिटक" को त्रिपिटकों में श्रेष्ट दर्जा प्राप्त है। 

  • बौद्ध धर्म का एन्साइक्लोपीडिया "सुत्तपिटक" को कहा जाता है। 

  • मठ में रहने वाले बौद्ध भिक्षुओं के अनुशासनों से सम्बंधित नियमों की जानकारी "विनयपिटक" से मिलती है। 

  • बौद्ध दर्शनों व मतों की दार्शनिक व्याख्या "अभिधम्म पिटक" में मिलती है। 

  • "अभिधम्म पिटक" का संकलन सम्राट के अशोक के शासनकाल में सम्पन्न "तृतीय बौद्ध संगीति" में "मोगलिपुत्त तिस्स" के द्वारा सम्पन्न किया गया था। 

  • गौतम बुद्ध के पूर्व जन्म की कहानियां "जातक" में संकलित हैं। 

  • "दीपवंश" की रचना चौथी सदी में हुई थी। 

  • सिंहल द्वीप के इतिहास में प्रथम बार प्रकाश "दीपवंश" में डाला  गया था। 

  • "महावंश" की  रचना चौथी सदी में हुई थी। 

  • "महावंश" से मगध के राजाओं की सूचि प्राप्त होती है। 

  • "महावस्तु" और "ललित सागर" ग्रंथ से महात्मा बुद्ध के विषय में जानकारी प्राप्त होती है। 

  • प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों की जानकारी सर्वप्रथम "अंगुत्तरनिकाय" में मिलती है। 

  • "आर्यमंजूश्रीमूलकल्प" के द्वारा बौद्ध दृष्टिकोण से गुप्त सम्राटों का वर्णन मिलता है। 

  • यूनानी राजा मिनांडर तथा बौद्ध भिक्षु नागसेन के दार्शनिक वार्तालाप की जानकारी "मिलिन्दपन्हो" से मिलती है। 

  • हीनयान सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रंथ "कथावस्तु" है। 

  • "कथावस्तु" से महात्मा बुद्ध के जीवन चरित अनेक कथानकों के साथ वर्णित किया हुआ मिलता है। 

जैन साहित्य (Jain literature)

  • जैन साहित्य को "आगम" कहा जाता है। 

  • जैन आगम के अंतर्गत 12 महत्वपूर्ण अंग आते हैं। 

  • आगम में 12 उपांगों, 10 प्रकीर्ण, 6 छंद सूत्र के अतिरिकत नन्दिसूत्र, अनुयोग द्वारा एवं मूल सूत्र भी सम्मिलित है। 

  • जैन आगम ग्रंथों की रचना महावीर की मृत्यु के पश्चात श्वेतांबर सम्प्रदाय के आचार्यों के द्वारा की गयी थी। 

 

धार्मिकेत्तर साहित्य (Non-religious literature)

  • भारत का प्रथम राजनैतिक ग्रंथ "अर्थशास्त्र" है।

  • मौर्य कालीन इतिहास और तत्कालीन अर्थव्यवस्था सहित राजनितिक व्यवस्था की विशद जानकारी "अर्थशास्त्र" से प्राप्त होती हैं। 

  • "अर्थशास्त्र"के लेखक थे प्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ गुरु चाणक्य (उपनाम - कौटिलीय अथवा विष्णुगुप्त)

  • "अर्थशास्त्र" 15 अधिकरणों एवं 180 प्रकरणों में विभाजित है। 

  • मौर्यकालीन इतिहास की जानकारी विशाखदत्त रचित "मुद्र्राक्ष" से भी प्राप्त होती है। 

  • सोमदेव द्वारा रचित "कथासरित्सागर"  भी मौर्यकालीन इतिहास से परिचित करता है। 

  • वाणभट्ट द्वारा रचित "हर्षचरति" से राजा हर्षवर्धन के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है। 

  • चालुक्य नरेश विक्रमादित्य के सम्बन्ध में प्रचुर जानकारी विल्हण द्वारा रचित "विक्रमांक देव चरति" से प्राप्त होती है। 

  • अरबों की सिंध विजय की जानकारी अली अहमद द्वारा रचित "चचनामा" से प्राप्त होती है। 

  • संस्कृत साहित्य में ऐतिहासिक घटनाओं को समेटने का प्रथम प्रयास कल्हण ने अपनी पुस्तक "राजतरंगिणी" में की थी। 

  • "कश्मीर के इतिहास" की जानकरी "राजतरंगिणी" से मिलती है। 

  • भारत पर यूनानी आक्रमण की जानकारी "गार्गी संहिता" से प्राप्त होती है।

  • गुप्त वंश के इतिहास की जानकारी कालिदास द्वारा रचित "रघुवंशम" और विशाखदत्त द्वारा रचित "देवी चंद्रगुप्तम" से भी प्राप्त होती है। 

  • गुप्तकालीन सांस्कृतिक इतिहास की जानकारी "शूद्रक" द्वारा रचित "मृछकटिकम" से प्राप्त होती है। 

  • वत्सराज उदयन के विषय की जानकारी "स्वप्नवासवदत्तम" से प्राप्त होती है। 

  • कालिदास ने चौथी शताब्दी में "मालविकाग्निमित्रम" की रचना की थी।

  • "मालविकाग्निमित्रम" से सुंग वंश के इतिहास की जानकारी मिलती है।

Design Paper
Contact Us

Contact Information

…  6209908627  

  • Whats app
  • LinkedIn
  • Facebook
  • Twitter

                                              Thanks for your interest in Nutangyankosh.

                      For more information, feel free to get in touch and I will get back to you soon!

©2020 by nutangyankosh. Proudly created with Wix.com