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 प्राचीन भारत (Ancient India ) Part - II

वेदांग (Vedang)

  • वेदांगों की रचना ऋषि ने वेदों को भली भांति प्रकार से समझने और समझाने के लिए की थी। 

  • वेदांगों की संख्या 6 हैं:- शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष 

 

ब्राह्मण (Brahmin)

  • यज्ञों और कर्म काण्डों के विधि विधान एवं उनके क्रियाओं को अच्छी तरह से समझने और समझाने के लिए ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गयी। 

 

पुराण (Puraan)

  • पुराणों की संख्या 18 है। 

  • सबसे प्राचीन और प्रामाणिक पुराण मत्स्यपुराण हैं। 

  • पुराणों की रचना 5 वीं शताब्दी ई०  पू०  है। 

  • पुराणों और भारतीय ऐतिहासिक कथाओं का रोचक व् क्रमबद्ध विवरण मिलता है जो प्रामाणिक भी है। 

  • पुराणों के रचियता महर्षि लोमहर्ष, जिनके रचनाकर्म को आगे बढ़ाया उनके पुत्र उग्रश्रवा ने। 

  • इन पांच पुराणों में राजाओं की वंशावली पायी जाती है :-

  • मत्स्य पुराण - आन्ध्र सातवाहन वंश 

  • विष्णु पुराण - मौर्य वंश
  • वायु पुराण - गुप्त वंश 

 

आरण्यक (Aranyak)

  • इसमें रहस्यमय एवं दार्शनिक विषयों का विवरण मिलता है। 

  • इसे ब्राह्मण साहित्य का अंतिम भाग माना जाता है। 

 

उपनिषद (Upanishads)

  • उपनिषद का शाब्दिक अर्थ होता है:- पास बैठना 

  • उपनिषद वह रहस्य विधा अथवा ब्रह्म विधा है जिसका ज्ञान शिष्यगण, गुरुजन के पास बैठकर प्राप्त किया करते थे। 

  • उपनिषदों को आध्यात्म विधा अथवा पराविधा की भी संज्ञा दी जाती है। 

  • उपनिषदों की कुल संख्या 108 मानी जाती है। 

  • प्रामाणिक उपनिषदों की संख्या मात्र 12 मानी जाती है। 

  • भारत देश का आदर्श वाक्य "सत्यमेव जयते" को मुण्डकोपनिषद से लिया गया है। 

  • वैदिक शिक्षा सम्बन्धी प्राचीनतम साहित्य "प्रतिशाख्य" है। 

  • सबसे बड़ा उपनिषद "वृहदककारणोउपनिषद" है। 

 

स्मृतियाँ (Memories)

  • स्मृतियों की रचना वेदांगों या सूत्रों के बाद हुई है। 

  • स्मृतिग्रंथों में सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ग्रंथ है - मनुष्मृति 

  • मनुस्मृति की रचना 200 ई०  पू० से 100 ई०  पू०  माना जाता है। 

  • मनुस्मृति के रचनाकार अथवा टीकाकार भारूचि, गोविंदराज, कुल्लूकभट्ट और मेघातिथि थे। 

  • मनुस्मृति को शुंग काल के मानक ग्रंथ का दर्जा प्राप्त है। 

  • गुप्त युग के विषय की विस्तारपूर्वक जानकारी "नारद स्मृति" से मिलती है। 

 

सूत्र (Sutr)

  • ई०  पू०  6 ठी शताब्दी के बाद तथा ई०  सम्वत के दौरान सूत्र साहित्य की रचना हुई। 

  • इसका उद्देश्य कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बात को कहने का प्रयास करना था। 

 

निरुक्त (Nirukt) 

  • "निघण्टु" क्लिष्ट वैदिक शब्दों का संकलन है, जिसकी व्याख्या करने के लिए महाकवि "यास्क" ने 5 वीं शताब्दी ई०  पू० में "निरुक्त" की रचना की थी। 

 

षड्दर्शन (Shddarshan)

  • ऋषि - महर्षियों ने उपनिषदों के दर्शन को 6 भागों में विभाजित किया है। 

  • ये निम्नवत हैं:-

  • पतंजलि का योगदर्शन

  • कपिल का सांख्य दर्शन

  • बादरायण का उत्तर मीमांशा

  • कणाद का वैशेषिक दर्शन

  • जैमिनी का पूर्व मीमांसा

  • गौतम का न्यायदर्शन 

  • पतंजलि पुष्यमित्र शुंग के पुरोहित थे जिनके द्वारा लिखित "महाभाष्य" से हमें शुंगों के इतिहास की जानकारी विस्तार रूप से मिलती है। 

  • "अष्टध्यायी" को संस्कृत भाषा व्याकरण की प्रथम पुस्तक का सम्मानीय दर्जा प्राप्त है। 

  • "अष्टध्यायी" की रचना "महर्षि पाणिनि" ने की थी। 

  • मौर्ययुगीन एवं उसके पूर्व के इतिहास व् मौर्यों के राजनितिक व्यवस्था की जानकारी "अष्टध्यायी" से मिलती है। 

  • "अष्टध्यायी" का रचनाकाल 400 ई०  पू० माना जाता है। 

  • "गार्गी संहिता" एक ज्योतिष ग्रंथ है जो "कात्यायन" रचित है, जिससे हमें भारत पर होने वाले "यवन आक्रमण" की जानकारी मिलती है। 

 

महाकाव्य (Epic)

  • भारत वर्ष के दो सर्वाधिक प्राचीन महाकाव्य हैं - 1. रामायण और 2. महाभारत 

  • रामायण के रचियता "महर्षि वाल्मीकि" ने की है। 

  • संस्कृत भाषा में इसकी रचना 5 वीं सदी में हुई थी। 

  • इसमें आरम्भ में 6000 श्लोक थे जो बाद में 12000 और कालांतर में 24000 श्लोक हो गए। 

  • रामायण को "चतुर्विंशति साहस्त्री संहिता" भी कहा जाता है।  

  •  महाभारत के रचियता "महर्षि वेदव्यास" हैं। 

  •  आरम्भ में महाभारत को "जयसंहिता" भी कहा जाता था। 

  • महाभारत का रचनाकाल 400 ई०  पू० है। 

  • जब महाभारत में श्लोकों की संख्या 8800 थी तब इसे "जयसंहिता" कहा जाता था। 

  •  जब महाभारत में श्लोकों की संख्या 2400  हुई तब इसे "भारत " कहा गया  था। 

  • कालांतर में जब इसके श्लोकों की संख्या 24000 से बढ़कर 100000 हो गयी तब इसका नाम "शतसहस्त्री संहिता" और "महाभारत" कहा जाने लगा।

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