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अधातु के प्रमुख यौगिक एवं उपयोग 

आयोडीन (I):-

  • कीटाणुनाशक के रूप में

  • टिंचर आयोडीन एवं रंग बनाने में

 

ब्रोमीन (Br):-

  • रंग

  • टिंचर

  • गैस

  • औषधि बनाने में एवं प्रतिकारक के रूप में। 

 

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl):-

  • अम्लराज (HCl + HNO3) 

  • रंग

  • क्लोराइड लवण बनाने में। 

 

क्लोरीन (Cl):-

  • मस्टर्ड गैस एवं विरंजक चूर्ण बनाने में। 

 

सल्फ्युरिक अम्ल (H2SO4):-

  • प्रतिकारक के रूप  में

  • पेट्रोलियम के शुद्धिकरण में एवं संचालक सेलों में। 

 

सल्फर डाई ऑक्साइड (H2SO4):-

  • ऑक्सीकारक एवं अवकारक दोनों रूपों में विरंजक के रूप में 

 

हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S):- 

  • लवणों के भास्मिक मूलकों के गुणात्मक विश्लेषणों में। 

 

सल्फर (S):-

  • कीटाणुनाशक के रूप में 

  • रबर के वल्कनीकरण के रूप में

  • बारूद एवं औसधि बनाने में। 

 

अमोनिया (NH3):-

  • प्रतिकारक के रूप में

  • बर्फ फैक्टरी में

  • रेयॉन बनाने में। 

 

नाइट्रस ऑक्साइड (N2O):-

  • शल्य चिकित्सा में। 

 

फॉस्फोरस (P):-

  • लाल फॉस्फोरस - दियासलाई बनाने में 

  • श्वेत फॉस्फोरस - चूहे मारने की दवा, औषधि बनाने में। 

 

प्रोडूसर गैस (CO + N2):-

  • ईंधन एवं धातु के निष्कर्षण में। 

 

कोल् गैस :-

  • ईंधन के रूप में  एवं निष्क्रिय वातावरण तैयार करने में। 

 

वाटर गैस (CO + H2):-

  • ईंधन एवं वेल्डिंग कार्यों के रूप में। 

 

कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2):-

  • सोडावाटर में 

  • आग बुझाने में

  • शुष्क बर्फ बनाने में

  • हरित गृह प्रभाव उत्पन्न करने में। 

ग्रेफाइट :-

  • शुष्क सेलों में

  • लोहे के बने पदार्थों पर पॉलिश करने में

  • लिखने में

  • कृत्रिम हीरा बनाने में। 

 

हीरा (Diamond):-

  • आभूषण बनाने में

  • चट्टानों एवं काँचों को काटने में। 

 

हाइड्रोजन परऑक्साइड (H2O2):-

  • ऑक्सीकारक के रूप में

  • कीटाणुनाशक के रूप में

  • रेशम, ऊन, चमड़ों के विरंजन में। 

 

भरी जल (D2O):-

  • नाभिकीय रिएक्टर में मंदक के रूप में।