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ज्ञानपीठ पुरस्कार किसे कहते है?

भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1965 में की गयी थी। देश का कोई भी व्यक्ति जो भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में बताई गई 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में लिखता हो, इस पुरस्कार के योग्य है।

वर्ष 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारें में संक्षिप्त जानकारी:

55वां ज्ञानपीठ पुरस्कार 2019

मलयालम के प्रमुख कवि अक्कीथम को 55वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया है। ज्ञानपीठ चयन बोर्ड ने बयान जारी कर कहा, ”ज्ञानपीठ चयन बोर्ड ने एक बैठक में आज 55 वें ज्ञानपीठ पुरस्कार 2019 के लिए मलयालम के प्रसिद्ध भारतीय कवि अक्कीथम को चुना है।

अक्कीथम का नाम मलयालम कविता जगत में आदर के साथ लिया जाता है। उनका जन्म 1926 में हुआ था और पूरा नाम अक्कीथम अच्युतन नम्बूदिरी है और वह अक्कीथम के नाम से लोकप्रिय हैं।

उन्होंने 55 पुस्तकें लिखी हैं जिनमें से 45 कविता संग्रह है। पद्म पुरस्कार से सम्मानित अक्कीथम को सहित्य अकादमी पुरस्कार, केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार (दो बार) मातृभूमि पुरस्कार, वायलर पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

अक्कीथम अभी तक 55 किताबें लिख चुके हैं जिनमें 45 कविता संग्रह हैं । इनमें से कुछ चर्चित किताबे- खंड काव्य, कथा काव्य, चारित्र काव्य और गीत। उनकी कुछ प्रसिद्ध कृतियों में वीरवदाम, बालिदर्शनम, निमिषा क्षेठ्राम, अमृता खटिका, अक्खितम कविताखका, महाकाव्य ऑफ ट्वेंटीथ सेंचुरी और अंतिमहकलम शामिल हैं।

2011 से 2019 के ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित साहित्यकारों की सूचि:-