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गुप्त साम्राज्य का प्रशासन - II

गुप्त साम्राज्य का प्रशासन  - II
    याज्ञवलक्य ऋषि ने शूद्रों को नमः शब्द  का प्रयोग करके पंचमहायज्ञ करने की अनुमति प्रदान की थी (स्रोत:- याज्ञवल्क्य स्मृति)

    गुप्तकाल के कलाकारों ने ही सर्वप्रथम "शिव के अर्धनारीश्वर रूप" की कल्पना की थी। 

    गुप्तकाल में चांदी के सिक्के "रूप्यका" कहलाते थे। 

    गुप्तकाल में स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं - सारनाथ (वाराणसी) में बैठे हुए बुद्ध की मूर्ति और सुल्तानगंज में बुद्ध के तांबे की मूर्ति। 

    गुप्तकाल "अजंता की गुफाएं" बौद्ध धर्म की महायान शाखा से संबधित है। 

    अजंता की गुफा संख्या 17 को "चित्रालय (चित्रशाला)" कहा गया है। 

    अजंता गुफाओं में से 16 और 17 गुप्त काल की है। 

    गुफा संख्या 16 में उत्कीर्ण "मरणासन्न राजकुमारी" का चित्र उत्कृष्ट कला का नमूना है। 

    गुप्तकाल में ही निर्मित अन्य गुफा वस्तुतः बाघ की गुफा है। यह गुफा ग्वालियर के नजदीक बाघ नामक स्थान पर विन्ध्यपर्वत को काट कर बनायीं गयी है। 

    गुप्तकाल को "संस्कृत साहित्य का स्वर्णयुग" माना जाता है। 

    चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में संस्कृत भाषा के विश्वप्रसिद्ध कवि "कालिदास" थे। 

     कालिदास को भारत का "शेक्शपीयर" भी कहा जाता है। 

    संस्कृत साहित्य के सर्वाधिक रोचक नाटकों में से एक है "मृच्छकटिकम" जिसकी रचना "शूद्रक" ने की थी। 

    संस्कृत भाषा में "विष्णु शर्मा" द्वार रचित "पंचतंत्र" विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ है। 

    पंचतंत्र को पांच भागों में बांटा गया है - मित्रभेद, मित्रलाभ, संधि - विग्रह, लब्ध - प्रणाश और अपरीक्षाकारित्व। 

    चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में रहने वाले प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य "धन्वन्तरि" थे। 

    धन्वन्तरि एक "आयुर्वेदिक चिकित्सक" थे। 

    गुप्तकाल के महान गणितज्ञ थे "आर्यभट्ट"

    आर्यभट्ट ने "आर्यभट्टीयम" एवं "सूर्यसिद्धांत" नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे। 

    आर्यभट्ट ने ही सर्वप्रथम बताया की "पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है"।

    दशमलव प्रणाली की शुरुआत भी "आर्यभट्ट" ने ही की थी। 

    आर्यभट्ट ने ही गणित को खगोल विज्ञान से अलग  किया था। 

    भारत में "अणु - सिद्धांत" का प्रतिपादन सर्वप्रथम गुप्तकाल में ही हुआ था। 

    चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में रहने वाले कुछ प्रमुख विद्वान् थे - वराहमिहिर, आर्यभट्ट, धन्वन्तरि, ब्रह्मगुप्त आदि। 

    "ब्रह्मगुप्त महान" वैज्ञानिक न्यूटन के पूर्वगामी थे। 

    ब्रह्मगुप्त ने ही सबसे पहले कल्पना की थी की "प्रकृति के एक नियमानुसार सभी वस्तुएं पृथ्वी पर गिरती है और ऐसा इसीलिए होता है की पृथ्वी सम्भवतः सभी वस्तुओं को अपनी ओर खिंच सकती है"।

    गुप्तकाल के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री "वराहमिहिर" थे। 

    वराहमिहिर ने "वृहत्संहिता" और "पंचसिद्धांतिका" नामक ग्रंथों की रचना की थी। 

    ब्रह्मगुप्त जो प्रसिद्ध गणितज्ञ थे ने "ब्रह्मसिद्धान्त" नामक ग्रंथ की रचना की थी। 

    पुराणों की वर्तमान रूप में रचना भी गुप्तकाल में ही हुई थी  जिसमें ऐतिहासिक परम्पराओं का वर्णन है। 

    धर्मशास्त्र की रचना भी गुप्तकाल में ही हुई थी।  

    मंदिर बनाने वाले कला का विकास भी  गुप्तकाल में ही हुआ था। 

    गुप्तकाल में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति हुई। 

    कशी, मथुरा, पाटलिपुत्र, काँची, वल्लभी, पद्मावती, उज्जयनी, नासिक आदि गुप्त काल के प्रमुख शैक्षिक केंद्र थे। 

    वात्स्यायन ने "कामसूत्र" की रचना गुप्तकाल में ही की थी। 

    गुप्तकाल में ही ईश्वरकृष्ण ने "सांख्यकारिका" की रचना की थी। 

    संस्कृत साहित्य में कालिदास ने "कुमार सम्भव", "मेघदूत", "अभिज्ञानशाकुंतलम" तथा "मालविकाग्निमित्रम" की रचना गुप्तकाल में की थी। 

    गुप्तकाल को सांस्कृतिक उपलब्धियों के कारण भारतीय इतिहास का "स्वर्ण युग" माना जाता है। 

    गुप्तकालीन अभिलेख व् उनके पवर्तक:------------------