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सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) - Part I

  • पुरातात्विक इतिहास को समझने की नवीनतम विधि रेडियोकार्बन C 14 विश्लेषण पद्धति है। 

  • रेडियोकार्बन पद्धति के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के परिपक्व चरण की सर्वमान्य तिथि मानी गयी है - 2500 ई० पूर्व से 1750 ई० पूर्व। 

  • सिंधु सभ्यता का दूसरा नाम सैंधव सभ्यता भी है। 

  • सिंधु सभ्यता की खोज 1921 ई० में "रायबहादुर दयाराम साहनी" ने की थी। 

  • सिंधु सभ्यता को विश्व की प्राचीनतम सब्यताओं - मिस्र, मेसोपोटामिया, क्रीट एवं सुमेर के सामान विकसित थी। 

  • सिंधु सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी। 

  • सिंधु  सभ्यता के बड़े नगरों की संख्या 6 थी - मोहनजोदड़ो, कालीबंगा (कालीबंगन), धौलावीरा, हड़प्पा, राखीगढ़ी और गणवारीवाला । 

  • मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई० में "राखालदास बनर्जी" ने की थी। 

  • सिंधु सभ्यता को प्राकऐतिहासिक (Prehistoric) अथवा कांस्य युग (Bronze Era) में रखा गया है। 

  • सिंधु सभ्यता के मुख्य निवासी द्रविड़ एवं भूमध्यसागरीय थे। 

  • सिंधु घाटी सभ्यता को हङप्पा सभ्यता भी कहा जाता है। 

  • हड़प्पा के अवशेषों को सर्वप्रथम चार्ल्स मैसन ने प्रकाशित किया था। 

  • सिंधु सभ्यता को सर्वप्रथम हडप्प सभ्यता का नाम दिया था "जॉन मार्शल" ने। 

  • मोहनजोदड़ो पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिले में स्थित है। 

  • भारत की आजादी के बाद हड़पा संस्कृति के अधिकाँश स्थल गुजरात में खोजे गए। 

  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को एक विस्तारित साम्राज्य की जुड़वाँ राजधानी पुरातत्विद "पिग्गट" ने कहा था। 

  • सिंधु सभ्यता का क्षेत्रफल प्रायः - 12,99,600 वर्ग किमी था।

  • सिंधु सभ्यता पूर्व में मेरठ जिले के आलमगीर से पश्चिम में मकरान तट के प्रदेश तक और दक्षिण में किम सागर के संगम पर भगतराव से लेकर उत्तर में जम्मू के मांडा तक विस्तारित था। 

  • सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक पूर्वी पुरास्थल जिला मेरठ, उत्तरप्रदेश के आलमगीर में, सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल बलूचिस्तान के सुतकागेंडोर में, उत्तरी पुरास्थल जिला अखनूर, जम्मू कश्मीर के मांडा में और दक्षिणी पुरास्थल जिला अहमद नगर, महाराष्ट्र के दाईमाबाद में खोजे गए हैं। 

  • मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ "मृतकों का टीला" होता है। 

  • सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत सम्भवतः "मोहनजोदड़ो का अन्नागार" है। 

  • सिंधु सभ्यता का सम्पूर्ण क्षेत्र "त्रिभुजाकार" है। 

  • सिंधु सभ्यता की मुख्य फसलें "गेंहूँ और जौ" थीं। 

  • सिंधु सभ्यता की धौलावीरा (गुजरात) पुरास्थल की खोज सर्वाधिक नवीनतम खोज है। 

  • मोहनजोदड़ो की खुदाई से मिला स्नानागार एक प्रमुख स्मारक है। 

  • इस स्नानागार के बीचों बीच स्थित स्नानकुण्ड 11.8 मीटर लम्बा, 7.01 मीटर चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा है। 

  • सिंधु सभ्यता में अग्निकुण्ड "कालीबंगा (राजस्थान)" और "लोथल (गुजरात)" से प्राप्त हुए हैं। 

  • क्षेत्रफल की दृष्टि से प्राचीन सभ्यताओं में हड़प्पा संस्कृति का विस्तार सर्वाधिक विस्तारित था। 

  • सिंधु सभ्यता के निवासियों ने अपने नगरों तथा घरो के विन्यास हेतु ग्रिड पद्धति को अपनाया था। 

  • नक्काशी दर ईंटों एवं जुते हुए खेत के साक्ष्य "कालीबंगा (राजस्थान)" से प्राप्त हुए हैं। 

  • सिंधुघाटी के सोने और चांदी का आयात अफगानिस्तान से करते थे। 

  • सिंधु सभ्यता के लोग मिठास के लिए शहद का प्रयोग करते थे। 

  • सिंधु सभ्यता के लोग शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के थे। 

  • मोहनजोदड़ो से पायी गयी एक शील पर तीन मुँह वाले देवता - पशुपतिनाथ की मूर्ति के चारों ओर हाथी, गैंडा, चिटा और भैंसा की भी मूर्ति मौजूद है। 

  • सिंधु सभ्यता के लोग ऊनि और सूती  वस्त्रों का प्रयोग करते थे। 

  • फलों के अंतर्गत सिंधु निवासी केला, नींबू और खजूर भी उगाते थे। 

  • सिंधु निवासी नाव बनाने का काम भी जानते थे। 

  • सिंधु घाटी मेंमिले महत्वपूर्ण अवशेष में शामिल हैं - दुर्ग, रक्षा - प्राचीर, निवासगृह, चबूतरे एवं अन्नागार। 

  • हड़प्पा की मोहरों पर सबसे ज्यादा एक "ऋंगी - पशु" का अंकन मिलता है। 

  • मोहनजोदड़ो से प्राप्त मुद्रा में "गरुड़" का अंकन मिलता है। 

  • हड़प्पा से ताँबे की बनी हुई एक "इक्कागाड़ी" भी मिली है। 

  • हड़प्पा से ताँबे का बना हुआ एक "दर्पण" भी मिला है। 

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