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मगध साम्राज्य का उत्थान (The rise of Magadha Empire)

मगध साम्राज्य के उत्थान में निम्नलिखित प्रारम्भिक राजवंशों का योगदान प्रमुख था - 

1. बृहद्रथ वंश 2. हर्यक वंश 3. शिशुनाग वंश 4. नन्द वंश 

 

बृहद्रथ वंश (Brihadrath Dynasty) 

  • 6 ठी शताब्दी ईसा पूर्व में मगध एक छोटा राज्य ही था। 

  • मगध के महत्वाकांक्षी शासकों ने इस राज्य के उत्थान व् विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

  • बृहद्रथ वंश  मगध राज्य का सबसे प्राचीन राजवंश था। 

  • बृहद्रथ वंश  का संस्थापक राजा बृहद्रथ था। 

  • बृहद्रथ के पिता का नाम "वसु" था जिन्होंने "वसुमती" की स्थापना की थी। 

  • प्रतापी राजा "जरासंघ" बृहद्रथ का पुत्र था। 

  • बृहद्रथ की राजधानी गिरिब्रज (राजगीर) थी। 

  • जरासंघ अपने साम्राज्य का विस्तार पुरे उत्तर भारत में करना चाहता था पर पांडवों और कृष्ण के विरोध ने उसे अपने उद्देश्य में सफल नहीं होने दिया। 

  • भीम के हाथों मल्ल युद्ध में जरासंघ मारा गया था। 

  • जरासंध की मृत्यु के बाद उसका बेटा मगध की गद्दी पर बैठा। 

  • बृहद्रथ वंश का अंतिम शासक "रिपुंजय" था। 

  • रिपुंजय की हत्या उसके मंत्री पुलिक ने कर अपने पुत्र को शासक बनाया जो ज्यादा समय तक शासन नहीं कर पाया। 

  • भट्टिय नामक  सामंत ने पुलिक के पुत्र की हत्या कर अपने पुत्र "बिम्बिसार" को मगध की गद्दी पर बिठा दिया। 

 

हर्यक वंश (Haryaka Dynasty)

  • बिम्बिसार को हर्यक वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। 

  • बौद्ध ग्रंथों के अनुसार बिम्बिसार 544 ईसापूर्व मगध की गद्दी पर बैठा था। 

  • मगध की गद्दी पर बिम्बिसार से 52 वर्षों तक शासन किया। 

  • बिम्बिसार की राजधानी गिरिब्रज (राजगृह) थी। 

  • बिम्बिसार के अन्य नाम थे - श्रोणिक एवं क्षैत्रोजस 

  • बिम्बिसार ने अंग राज्य के शासक "ब्रह्मदत्त" को हराकर अपने पुत्र "अजातशत्रु" को अंग का शासक बनाया। 

  • बिम्बिसार ने साम्राज्य विस्तार के लिए "विवाह समबन्ध" बनाने की निति का भी इस्तेमाल किया। 

  • बिम्बिसार ने कौशल के राजा "प्रसेनजित" की बहन "महाकोशला", वैशाली नरेश "चेटक" की बेटी "राजकुमारी चेलेना" तथा मद्र (पंजाब) देश की राजकुमारी "क्षेमा" से विवाह कर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। 

  • बिम्बिसार "बौद्ध धर्म" का अनुयायी था। 

  • बिम्बिसार ने महात्मा बुद्ध की सेवा में अपने राजवैध "जीवक" को भेजा था। 

  • अजातशत्रु ने 493 ईसा पूर्व अपने पिता की हत्या कर मगध की गद्दी हथिया ली। 

  • अजातशत्रु का उपनाम "कुणिक" था। 

  • अजातशत्रु ने मगध पर 32 वर्षों तक शासन किया था। 

  • अजातशत्रु शुरू में "जैनधर्म" का अनुयायी था परन्तु बाद में उसने बौद्ध - धर्म को अपना लिया था। 

  • अजातशत्रु को इतिहास में "पितृहन्ता" (पिता की हत्या करने वाला) भी कहा जाता है। 

  • अजातशत्रु ने अपने सुयोग्य और कूटनीतिज्ञ मंत्री "वर्षकार (वरसकार)" की सहायता से "वैशाली" राज्य को जीतकर अपने अधीन कर लिया। 

  • अजातशत्रु के शासनकाल में ही "राजगृह" में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था। 

  • अजातशत्रु ने "रथमूल" और "महाशिला कंटक" नामक नए हथियारों का सर्वप्रथम प्रयोग किया था। 

  • अजातशत्रु एक महान योद्धा के साथ साथ साम्राज्य विस्तारवादी निति का समर्थक था। 

  • अजातशत्रु का पुत्र "उदायिन" था। 

  • उदायिन ने 461 ईसा पूर्व अपने पिता की हत्या कर दी और मगध की गद्दी हथिया ली। 

  • उदायिन ने मगध पर 33 वर्ष तक शासन किया। 

  • उदायिन "जैन धर्म" का अनुयायी था। 

  • उदायिन ने "पाटलिग्राम" की स्थापना की थी। 

  • उदायिन ने अपनी राजधानी पाटलिग्राम (पाटलिपुत्र आधुनिक नाम - पटना) स्थानांतरित की थी। 

  • हर्यक वंश का अंतिम शासक उदायिन पुत्र "नागदशक" था। 

  • शिशुनाग ने 421 ईसा पूर्व नागदशक को पद से अपदस्थ कर दिया और स्वयं मगध का शासक बन बैठा। 

  • नागदशक का आमात्य था "शिशुनाग" ।

  • शिशुनाग ने ही "शिशुनाग वंश" की स्थापना की थी। 

 

शिशुनाग वंश (Shishunag Dynasty)

  • शिशुनाग ने अवन्ति और वत्स राज को हराकर मगध साम्राज्य में मिला लिया था। 

  • शिशुनाग ने अपने राज्य की  राजधानी "पाटलिग्राम" से हटाकर "वैशाली" में स्थापित कर दी थी। 

  • शिशुनाग का उत्तराधिकारी उसका पुत्र "कालाशोक" था। 

  • कालाशोक 396 ईसा पूर्व मगध के सिंहासन पर आसीन था। 

  • कालाशोक ने पुनः अपनी राजधानी वैशाली से पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दी। 

  • कालाशोक के शासनकाल में ही दूसरी बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था 

  • शिशुनाग वंश का अंतिम शासक "नन्दिवर्धन" था। 

 

नन्द वंश (Nand Dynasty)

  • महापद्मनंद ने शिशुनागवंश का अंत करके "नंदवंश" की स्थापना की। 

  • नन्द वंश का प्रथम शासक "महापद्मनंद" था। 

  • महापद्मनंद नन्द वंश का संस्थापक और सर्वाधिक शक्तिशाली शासक भी था। 

  • नन्द वंश का अंतिम शासक "घनान्द" था। 

  • घनान्द के शासनकाल में ही सिकंदर ने पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण कर दिया था। 

  • सिकंदर के भारत से जाने के बाद मगध साम्राज्य में अव्यवस्था और अशांति फ़ैल गयी थी। 

  • प्रजा घनान्द के अत्याचार से ग्रसित थी और पुरे मगध में अराजकता फ़ैल गयी थी। 

  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने मागध में फैली अराजक और विस्फोटक स्थिति का लाभ उठाया। 

  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से युद्ध में घनान्द को पराजित कर मगध पर अपना अधिकार कर लिया। 

  • घनान्द को हराकर "चन्द्रगुप्त मौर्य" ने मगध पर "मौर्य वंश" की स्थापना की। 

  • इस प्रकार नन्द वंश के पतन के बाद मगध पर "मौर्य वंश" का आरम्भ हुआ।