google.com, pub-3332830520306836, DIRECT, f08c47fec0942fa0

सम्राट अशोक (Emperor Ashoka)

अशोक महान (269 - 232 ईसा पूर्व)

  • अशोक के सभी अभिलेखों में यह घोषणा वर्णित है की "सभी मनुष्य मेरे बच्चे हैं" ।

  • अशोक की गणना विश्व के महानतम सम्राटों में होती है। 

  • बिन्दुसार की मृत्यु के पश्चात उसका मंझला पुत्र उसका उत्तराधिकारी बना जो 269 ईसा पूर्व मगध की राजगद्दी पर बैठा। 

  • मगध की राजगद्दी पर बैठने के पूर्व अशोक "अवन्ति" राज्य का राजयपाल था। 

  • पुराणों में अशोक को "अशोकवर्धन" कह कर सम्बोधित किया गया है। 

  • अशोक ने सिंहासन पर बैठने के 8 वर्ष बाद ही 261 ईसा पूर्व में  कलिंग पर आक्रमण कर दिया था। 

  • अशोक ने कलिंग तो जीत ही लिया था पर इस युद्द में हुए भयंकर रक्तपात ने उसका हृदय परिवर्तन कर दिया था। 

  • अशोक का अधिकार कलिंग की राजधानी "तोसली" पर हो गया था। 

  • प्रारम्भ में अशोक ब्राह्मण धर्म का पालक और शिव का उपासक था। 

  • पर कलिंग युद्ध के बाद उसने बौद्ध भिक्षु  "उपगुप्त" से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली और बौद्ध धर्मावलम्बी बन गया। 

  • "मास्की" और "गुर्जरा" अभिलेखों में अशोक का उल्लेख "अशोक" नाम से मिलता है। 

  • अशोक ने अपने अभिलेखों में स्वयं के लिए "प्रियदर्शी" शब्द एक प्रयोग किया था। 

  • अशोक एक अन्य उपनाम हैं:- कामाशोक, चण्डाशोक आदि। 

  • भारत में शिलालेखों का प्रचलन सर्वप्रथम अशोक ने ही किया था। 

  • अशोक के शिलालेखों में अरमाइक, ग्रीक, ब्राह्मी एवं खरोष्ठी लिपि का प्रयोग हुआ है। 

  • अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र "महेंद्र" और पुत्री "संघमित्रा" को श्रीलंका भेजा था। 

  • अशोक की राजधानी "पाटलिपुत्र" थी। 

  • बौद्ध धर्म ग्रंथों के अनुसार अशोक ने अपने निन्यानवे (99) भाइयों का वध कर एक कुँए में उनकी लाश डाली थी। 

  • वह कुँआ आज भी पटना के "अगमकुआं" नामक स्थान पर स्थित है। 

  • अपने भाइयों का वध करके ही अशोक मगध की गद्दी पर बैठा था। 

  • इतिहासज्ञ "प्लिनी" के अनुसार मिश्र के शासक "फिलाडेल्फस" (टॉलमी - II) ने अशोक के दरबार में "डियानीसियस" नामक एक राजदूत भेजा था। 

  • अशोक ने आजीवकों के रहें "बराबर की पहाड़ियों" में चार गुफाएं बनवाये थे, जिनका नाम था - सुदामा, विश्व झोपड़ी, कर्ज और चोपार। 

  • कलिंग युद्ध में हुए भीषण हिंसा ने अशोक को अहिंसक बना गया था। 

  • अशोक के शासन काल में तीसरी बौद्ध संगीति का आयोजन "पाटलिपुत्र" में "मोग्लिपुत्त तिस्स (उपगुप्त)" की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई थी। 

  • इतिहासकारों के अनुसार जम्मू - कश्मीर की राजधानी "श्रीनगर" की स्थापना अशोक ने ही करवाई थी। 

  • "अशोक का धम्म (धर्म)" सभी धर्मों का सार था। 

  • अशोक एक राजधर्म "बौद्ध धर्म" था। 

  • अशोक के शासनकाल में राजकीय भाषा "पाली" और राजकीय लिपि "ब्राह्मी" थी। 

  • अशोक के शासनकाल में "पाली जनसाधारण की भाषा" थी। 

  • अशोक के शिलालेख की खोज 1750 ई में "पादरेटी फेन्थ्लर" ने की थी। 

  • अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम सफलता 1837 ई में "जेम्स प्रिंसेप" को हुई। 

  • अशोक एक अभिलेखों को तीन भागों में बांटा जाता है - शिलालेख, स्तम्भलेख और गुहालेख। 

  • अशोक के अभिलेखों में प्रयोग हुए "ग्रीक एवं अरमाइक" लिपि का "अफगानिस्तान", "खरोष्ठी" लिपि का अभिलेख "उत्तर पश्चिम पाकिस्तान" से और "ब्राह्मी लिपि" के अभिलेख "शेष भारत" में मिलते हैं।  

  • सम्राट अशोक का सबसे लम्बा अभिलेख "सातवां अभिलेख" है। 

  • अशोक के "कौशाम्बी अभिलेख" को "रानी का अभिलेख" भी कहा जाता है। 

  • अशोक का सबसे छोटा स्तम्भ - लेख "रुम्मिनदेई" है। 

  • सम्राट के अशोक एक स्तम्भ लेखों की संख्य 7 है जो ब्राह्मी लिपि में अंकित है और 6 विभिन्न स्थानों से प्राप्त हुए है। 

  • "रुम्मिनदेई" अभिलेख में अशोक द्वारा लुम्बिनी में धम्म यात्रा के दौरान भू - राजस्व दर को घटा देने की घोषणा अंकित है। 

  • अशोक के धर्म के मूल सिद्धांत निम्नवता हैं:- 

  1. संयम 

  2. दया 

  3. दान 

  4. श्रद्धा 

  5. सेवा - सुश्रुषा 

  6. भाव शुध्दि 

  7. सत्य 

  8. शौच 

  9. कृतज्ञता 

  10. दृढ शक्ति 

Design Paper
Contact Us

Contact Information

…  6209908627  

  • Whats app
  • LinkedIn
  • Facebook
  • Twitter

                                              Thanks for your interest in Nutangyankosh.

                      For more information, feel free to get in touch and I will get back to you soon!

©2020 by nutangyankosh. Proudly created with Wix.com