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वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization) - Part III

वैदिक काल के प्रमुख दर्शन एवं प्रवर्तक / रचयिता

  • उपनिषदों का संकलन 600 ईसा पूर्व हुआ था। 

  • वैदिक आर्यों की सभ्यता  के अध्ययन के लिए सर्वाधिक प्रामाणिक ग्रंथ "ऋग्वेद" है। 

  • पूर्व वैदिक काल में पूजा का विधान स्तुति पाठ या यज्ञ के द्वारा किया जाता था। 

  • यज्ञाहूती या बली में जौ एवं शाक का प्रयोग किया जाता था। 

  • वेदों की संख्या चार है - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद 

  • आर्यों का सबसे पवित्र ग्रंथ "ऋग्वेद" को माना जाता है। 

  • ऋग्वेद में मण्डलों की संख्या 10, सूक्तो की संख्या 1028 तथा ऋचाओं की संख्या 10,462 है। 

  • ऋग्वेद का पाठ करने वाले को "होतृ" या "होता" कहा जाता था। 

  • कर्मकाण्ड प्रधान ग्रंथ "यजुर्वेद" है। 

  • यजुर्वेद "गध" और "पध" दोनों में रचा गया है। 

  • यजुर्वेद दो भागों में विभक्त है - कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद। 

  • यजुर्वेद का पाठ करने वाले ब्राह्मण को "अध्वारयु" कहा जाता था। 

  • "सामवेद" तत्कालीन भारत की गायन विधि का श्रेष्ठतम उदाहरण है। 

  • सामवेद में 1549 ऋचाएं हैं। 

  • सामवेद की ऋचाओं का गान करने वाले ब्राह्मण "उद्गात" कहलाते थे। 

  • अथर्वेद की रचना "अथर्वा" ऋषि ने की थी। 

  • अथर्वेद में कुल 20 अध्याय या मंडल, 731 सूक्त और 6000 मंत्र है। 

  • "अथर्व" शब्द का शाब्दिक अर्थ "पवित्र जादू" है। 

  • अथर्वेद में जादू - टोना, मंत्र, रोग - निवारण, अंधविश्वासों एवं विभिन्न औषधियों की जानकारी सहित विवाह, प्रेम, राजभक्ति आदि नाना प्रकार के विषय समाहित है। 

  • चारों वेदों के एक - एक उपवेद भी हैं।  

  • ये उपवेद हैं - आयुर्वेद, धनुर्वेद, गन्धर्वेद, शिल्पविद 

  • चिकित्सा से सम्बंधित उपवेद है "आयुर्वेद" ।

  • आयुर्वेद के रचनाकरों में से प्रमुख हैं - धन्वन्तरि, वाणभट्ट, सुश्रुत आचार्य, अश्विनी कुमार, लोलिंबराज, माधव आदि। 

  • धनुर्वेद में अस्त्र - शस्त्र बनाने, चलने एवं उनमें कुशलता प्राप्त करने की विधियों का वर्णन है। 

  • गन्धर्वेद में गायन - वादन, नृत्य आदि का वर्णन है। 

  • गन्धर्वेद के प्रमुख रचनाकारों में है - नारद, शंकर, तम्बस, भरत, शिलाली, विश्वासु आदि। 

  • शिल्पविद में शिल्पकला का वर्णन है। 

  • हिन्दू धर्म ग्रंथों में 33 करोड़ देवी - देवताओं का जिक्र किया गया है। 

  • राजा के राज्याभिषेक में 17 प्रकार के अभिमंत्रित जल का प्रयोग किया जाता था। 

  • राजा न्याय का सर्वोच्च अधिकारी होता था। 

  • पुराणों की संख्या 18 है जो निम्नवत है:- 

  • मार्कण्डेय पुराण, विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, गरुड़ पुराण, वामन पुराण, भागवत, अग्नि पुराण, मत्स्य पुराण, कूर्म पुराण, लिंग पुराण, वायु पुराण, ब्रह्म पुराण, भविष्य पुराण, वाराह पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण, नारद पुराण।