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वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization) - Part II

  • वैदिक काल में आर्यों के प्रिय देवता "इंद्र" थे। 

  • समिति और सभा को प्रजापति अथवा ब्रह्मा की जुड़वाँ संतानें कहा गया है "शतपथ ब्र्हामण " में। 

  • ऋग्वेद के 7 वें मंडल में "दसराज युद्ध (दस राजाओं का)" का उल्लेख मिलता है। 

  • दसराज युद्ध  पुरुष्णी (रावी) नदी के तट पर सुदास और दस जनों (राजाओं) के बीच लड़ा गया था। 

  • दसराज युद्ध  में जीत सुदास की हुई थी। 

  • वैदिक काल में पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए देवताओं से कामनाएं की जाती थी। 

  • आर्यों का परिवार एक संयुक्त परिवार हुआ करता था। 

  • वैदिक काल में समाज चार वर्गों या भागों में बंटा था - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। 

  • समाज का यह विभाजन अथवा वर्गीकरण व्यवसाय पर आधारित था। 

  • ऋग्वेद के 10 वें मंडल के "पुरुषसूक्त" में एक चतुर्वर्ण का उल्लेख मिलता है। 

  • "पुरुषसूक्त" के अनुसार परम पुरुष (परमेश्वर) के मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, जाँघों से वैश्य और चरणों से शूद्र उत्पन्न हुए हैं। 

  • राजनितिक संगठन की मुलभुत इकाई "कुटुम्ब " कहलाती थी, जिसका प्रधान कुलुप या कुलप्पा कहलाता था। 

  • वैदिक काल में अनेक कुटुम्बों का समूह "ग्राम" कहलाता था और उसके प्रमुख को "ग्रामिणी" कहा जाता था। 

  • अनेक ग्रामों के समूह को "विश" और उसके प्रधान को "विशपति" कहा जाता था। 

  • अनेक विशों के समूह को "जन" और उसके प्रधान को "गोप या राजन" कहा जाता था। 

  • पूर्वी प्रदेश में सम्राट के लिए "प्राची" शब्द का प्रयोग होता था। 

  • पश्चिमी प्रदेश में स्वराष्ट्र के लिए "प्रातिची" शब्द का प्रयोग होता था। 

  • उत्तर वैदिक प्रदेश में विराट के लिए "उदीची" शब्द का प्रयोग होता था। 

  • दक्षिणी प्रदेश में राजा के लिए "भोज" शब्द का प्रयोग होता था। 

  • ऋग्वेद में आर्यों के लिए "द्विज" शब्द का प्रयोग किया गया है जिसके अर्थ होता है " दो बार जन्म" । 

  • ऋग्वेद के अनुसार एक बार जन्म तब जब माँ के पेट से होता है और दूसरी बार जब "उपनयन संस्कार" हो। 

  • पत्नी के लिए "अर्धांगिनी" शब्द का प्रयोग "शतपथ ब्राह्मण" किया गया है। 

  • ऋग्वेद में पत्नी को "जायदेस्तम" कहा गया है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है "पत्नी ही गृह" । 

  • वैदिक काल में पत्नियों को पतियों के साथ यज्ञ कार्य में भाग लेने का अधिकार प्राप्त था। 

  • वैदिक काल में स्त्रियों को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार प्राप्त था। 

  • ऋग्वेद में सिकता, लोपामुद्रा, विश्वास, आपला एवं घोषा जैसी विख्यात विदुषियों का उल्लेख मिलता है। 

  • वैदिक काल में आजीवन अविवाहित रहने वाली स्त्रियों को "अमाजू" कहा जाता था। 

  • वैदिक काल में विधवा स्त्री को मृतक पति के छोटे भाई यानि अपने देवर से विवाह करने का अधिकार प्राप्त था। 

  • वैदिक समाज में महिलाओं को सम्मानीय स्थिति प्राप्त थी। 

  • वैदिक समाज में पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था। 

  • वैदिक समाज में पुरुष और स्त्री दोनों ही आभूषण ग्रहण करते थे। 

  • ऋग्वेद में मंदिर या मूर्तिपूजा का उल्लेख नहीं मिलता है। 

  • आर्यों का मुख्य पेय पदार्थ "सोमरस" था। 

  • सोमरस वनस्पतियों से बनाया जाता था।  

  • पूर्व वैदिक काल के लोग ऊन और मृग के चमड़े से बने वस्त्र भी धारण करते थे। 

  • आर्य मुख्यतः तीन प्रकार के वस्त्र धारण करते थे :- वारु, अधिवास और उष्णीय 

  • आर्य अंदर पहनने वाले वस्त्र को "निवि" कहते थे। 

  • आर्यों के मनोरंजन का मुख्य साधन थे - संगीत, द्यूतक्रीड़ा (जुआ या पैसा खेलना), घुड़दौड़, रथदौड़, आखेट अथवा शिकार करना। 

  • पूर्व वैदिक काल में लकड़ी उधोग, धातु  उधोग एवं बर्तन बनाने के उद्योगों का विकास हुआ। 

  • व्यापारिक कार्य "वस्तु विनिमय" प्रणाली के द्वारा किया जाता था। 

  • व्यापार कार्य जल और स्थल दोनों मार्गों द्वारा किया जाता था। 

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