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कुषाण राज्य (Kushan State)

  • विदेशी आक्रमणकारियों में सबसे आखिर में पह्लवों के बाद कुषाण भारत में आये। 

  • कुषाण चीन के "यूची" व् "तोखरि" जाती से सम्बंधित थे। 

  • यूची नाम का कबीला पांच भागों में बंट गया था, जिसमें से एक था "कुषाण"।

  • कुषाण वंश का भारत में संस्थापक "कुजुल कडफिसेस" था। 

  • कडफिसेस II ने कुषाण वंश को भारत में स्थायित्व प्रदान किया था। 

  • कुषाण वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक "कनिष्क" था। 

  • कुषाणों की राजधानी "पुरुषपुर" (पेशावर, पाकिस्तान) थी। 

  • कुषाणों की दूसरी राजधानी "मथुरा" थी। 

  • 78 ई में कनिष्क ने राजसत्ता संभालते ही एक सम्वत चलाया जिसको उसने नाम दिया - "शक संवत"। 

  • शक संवत को भारत सरकार द्वारा भी प्रयोग किया जाता है। 

  • कनिष्क ने अपना साम्राज्य मध्य एशिया से लेकर सारनाथ (वारणशी, उत्तरप्रदेश) तक फैला लिया था। 

  • कनिष्क बौद्ध धर्म का अनुयायी और संरक्षक भी था। 

  • कनिष्क के शासनकाल में चौथी बौद्ध संगीति कुण्डल वन (कश्मीर) में सम्पन्न हुई थी। 

  • कनिष्क बौद्ध धर्म के "महायान"  सम्प्रदाय का अनुयायी था। 

  • कनिष्क का शासन काल 78 ई से 102 ई तक था। 

  • भारत में सर्वाधिक शुद्धता वाले स्वर्ण सिक्के कुषाणों ने ही जारी किये थे। 

  • कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की उत्कृष्टता गुप्त काल के स्वर्ण सिक्कों से भी अधिक थी। 

  • कनिष्क काल में तीन प्रकार की मुद्राएं जारी की गयीं, जिनमें - प्रथम प्रकार की मुद्राओं  देवता,  चन्द्रमा दूसरे प्रकार की मुद्राओं पर ईरानी देवता, अग्नि के चित्र और तीसरी प्रकार की मुद्राओं पर बुद्ध के चित्र मिलते हैं। 

  • कनिष्क के  दरबार का महान आयुर्वेद चिकित्सक "चरक" थे। 

  • "चरक" कनिष्क के दरबार का राजवैध भी थे। 

  • कनिष्क के दरबार का राजकवि "अश्वघोष" थे। 

  • अश्वघोष ने "बुद्ध चरित" की रचना की थी। 

  • "बुद्ध चरित" को बौद्ध धर्म का "रामायण" भी कहा जाता है। 

  • अश्वघोष ने "सूत्रालंकार" की भी उत्कृष्ट रचना की थी। 

  • कनिष्क के शासनकाल में "वसुमित्र" ने "महाविभाष सूत्र" की रचना की थी। 

  • बौद्ध धर्म का विश्वकोश "महाविभाष सूत्र" को कहा जाता है। 

  • कनिष्क के  राजदरबार के अन्य विभूति निवम्नवत थे - 

  • नागार्जुन, पाशर्व, महाचेत, वसुमित्र, संघरक्ष। 

  •  भारत के "आइंस्टाइन" "नागार्जुन" को कहा जाता है। 

  • नागार्जुन की प्रसिद्ध पुस्तक रचना है - "माध्यमिक सूत्र"। 

  • नागार्जुन ने "सापेक्षिता के सिद्धांत" का वर्णन "माध्यमिक सूत्र" में ही किया था। 

  • कनिष्क की मृत्यु 102 ई में हुई थी। 

  • कुषाण वंश का अंतिम शासक "वासुदेव" थे। 

  • भारतीय इतिहास के अनेक इतिहासकारों ने कनिष्क को "द्वितीय अशोक" की भी संज्ञा दी है। 

  • कनिष्क के शासनकाल में "गांधार शैली" का विकास और संरक्षण हुआ। 

  • कनिष्क के राजदरबार का महान राजनीतिज्ञ "मधर" था। 

  • कनिष्क के शासनकाल में "कनिष्कपुर" और "सिरमुख" जैसे प्रसिद्ध नगरों की स्थापना हुई थी। 

  • रेशम मार्ग पर नियंत्रण रखने वाले शासकों में सर्वप्रथम कुषाण शासक ही थे। 

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