google.com, pub-3332830520306836, DIRECT, f08c47fec0942fa0
 

शकों और पार्थियनों का राज्य

  • यूनानियों के बाद बतौर आक्रमणकारी शक भारत में आये थे। 

  • शक मूलतः मध्य एशिया की एक घुमक्कड़ जाती थी। 

  • शक जाती सरदारिया नदी के उत्तरी प्रदेश में निवास करती थी। 

  • शक जाती के लोग मूलतः चरागाह की खोज में भारत आये थे। 

  • शक कंधार एवं बलूचिस्तान के बोलन दर्रे से होते होए सिंध प्रदेश में आकर बस गए थे। 

  • जो वर्तमान में "शक द्वीप" कहलाता है। 

  • यूनानी विद्वानों ने शक द्वीप को "इण्डोसाइथिया" नाम दिया। 

  • शक ने भारत में उत्तर पश्चिम भाग से प्रवेश किया। 

  • शकों की पांच शाखाएं थी।

  • शकों की हर शाखा की राजधानी भारत और अफगानिस्तान में अलग - अलग भागों में थी। 

  • शकों की पहली शाखा ने अफगानिस्तान, दूसरी ने पंजाब, तीसरी ने मथुरा, चौथी ने पश्चिम भारत और पांचवी शाखा ने ऊपरी दक्क्न पर राज किया। 

  • अफगानिस्तान में शकों ने अपनी राजधानी "काबुल" को बनाया। 

  • पंजाब में शकों की राजधानी "तक्षशिला" को बनाया था। 

  • शकों की पांचवी शाखा ने सबसे लम्बे समय तक (चार शताब्दी तक) शासन किया। 

  • शकों ने यूनानी शासकों से भी अधिक भारतीय भू भाग पर अधिकार किया। 

  • शकों के प्रतिष्ठित राजवंश का नाम "कर्दमवंश" था। 

  • शकों का सर्वाधिक प्रतापी शासक "रुद्रदामन" था। 

  • रुद्रदामन का शासन 130 से 150 ई तक गुजरात के बड़े भू भाग पर था। 

  • रुद्रदामन ने अपने शासन काल में सौराष्ट्र प्रान्त स्थित मौर्यकालीन काठियावाड़ की अर्धशुष्क "सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार" कराया। 

  • रुद्रदामन ने सिंध, कोंकण, मालवा, काठियावाड़, गुजरात और नर्मदा घाटी के प्रदेशों पर अधिकार कर उन पर शासन किया था। 

  • रुद्रदामन "संस्कृत" भाषा का प्रेमी था। 

  • जहाँ पहले से प्राप्त अभिलेख "पाली" भाषा में थे वहीँ रुद्रदामन का "गिरनार अभिलेख" विशुद्ध संस्कृत भाषा में लिखा गया सबसे लम्बा अभिलेख है। 

  • गुजरात में समुद्री व्यापार से शकों को बहुत लाभ हुआ था, जिससे शकों ने बड़ी संख्या में "चाँदी के सिक्के" जारी किये। 

  • उज्जैन के शासक ने 58 ई  पू  में शकों को हराकर खदेड़ दिया और उसने "विक्रमादित्य" की उपाधि धारण की। 

  • उसी समय से "विक्रम संवत" नामक नया संवत शुरू हुआ और "विक्रमादित्य" एक लोकप्रिय उपाधि बन गयी। 

  • भारतीय इतिहास में "विक्रमादित्य" की उपाधि धारण करने वाले राजाओं की संख्या 14 तक पहुँच गयी थी। 

  • इन सभी में गुप्त शासक "चन्द्रगुप्त द्वितीय" सर्वाधिक विख्यात राजा था। 

  • चौथी शताब्दी के अंत में चन्द्रगुप्त द्वितीय ने मालवा और काठियावाड़ प्रदेशों को विजित कर और शकों को उन प्रदेशों से खदेड़ कर भारत में शकों की सत्ता को समाप्त कर दिया। 

पार्थियन (पह्लव) राज्य

  • शकों के बाद पह्लव या पार्थियायी आक्रमणकारियों का भारत में आधिपत्य हुआ। 

  • पार्थियन मूल रूप से ईरान के निवासी थे जिन्हे भारतीय इतिहास में "पह्लव" कहा गया। 

  • पह्लवों ने सर्वप्रथम "अराकोशिया" और "सिस्तान"  में अपनी राजयसतता स्थापित की जिसका संस्थापक "बनान" था। 

  • यूनानी शासक "एण्टियोकस द्वितीय" के विरुद्ध  विद्रोह का नेतृत्व पह्लवों को ओर से "आरसेकिज" ने किया था। 

  • अन्य पार्थियन शासक थे - मिथ्राडेटस प्रथम, मिथ्राडेटस द्वितीय तथा गोन्डोफर्निस। 

  • गोन्डोफर्निस पार्थिया का अंतिम व् सर्वाधिक शक्तिशाली सम्राट था। 

  • गोन्डोफर्निस के शासनकाल  में संत टॉमस नामक ईसाई धर्म प्रचारक भारत आया था  धर्म में प्रचार किया था। 

  • पार्थियनों की राजधानी "तक्षशिला" थी। 

  • पार्थियन "बौद्ध धर्मावलम्बी" थे। 

  • गोन्डोफर्निस की मृत्यु के साथ ही भारत में पार्थिया साम्राज्य का पतन होना शुरू हो गया। 

  • कुषाणों ने पार्थियनों पर लगातार और प्रभावी आक्रमण करके इनकी शक्ति को खत्म कर दिया।