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सम्राट अशोक महान 

  • अशोक के अभिलेख "ग्रीक और अरमाइक लिपि" में कंधार से प्राप्त हुए हैं ।

  • अशोक का "शार - ए - कुना" अभिलेख इन्हीं लिपियों में कंधार या कंदहार से प्राप्त हुआ है ।

  • अशोक के गुहालेखों की संख्या 3 है, जो बिहार में गया के निकट बराबर की पहाड़ी की गुफा में स्थित है। यहाँ तीन गुफाएँ हैं। इनमें स्थित गुहालेखों में आजीविकों को दिये गए दान का उल्लेख है।

  • मौर्य समराजय में अशोक के काल में पाँच प्रांत थे।

  • प्रान्तों को तब के समये में "चक्र" कहा जाता था।

  • प्रान्तों के प्रशासकों को "कुमार" या "आर्यपुत्र" अथवा "राष्ट्रिक" कहा जाता था।

  • प्रान्तों का विभाजन "विषय" में होता था जो "विषयपति" के अधीन होता था।

  • मौर्य सामराज्य में मुख्यमंत्री अवम पुरोहित की नियुक्ति किए जाने के पहले उनके चरित्र को काफी जांचा - परखा जाता था। इस जांच परख को "उपधा परीक्षण" कहा जाता था। 

  • सम्राट के राज काज में सहायता के लिए 12, 16 अथवा 20 सदस्यों की एक मंत्रिपरिषद होती थी।

  • कौटिल्य अथवा "चाणक्य" द्वारा रचित पुस्तक "अर्थशास्त्र" में शीर्षस्थ अधिकारी के रूप में "तीर्थ" का उल्लेख मिलता है। इसे महामात्र कहा जाता था जिनकी संख्या 18 होती थी।

  • मौर्य परशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम कहलती थी।

  • मौर्य प्रशासन का सर्वोच्चाधिकारी "सम्राट" होता था।

  • प्रशासन का सबसे छोटा अधिकारी "छोटा गोप" कहलता था।

  • मेगस्थनीज के अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों का एक मण्डल चलाता था।

  • यह मण्डल 6 समितियों में विभक्त था।

  • प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे।

  • सर्वोच्च न्यायालय राजधानी में स्थित था।

  • मुख्य न्यायाधीश को "धर्माधिकारी" कहा जाता था।

  • राज्य में दो प्रकार का न्यायालय होते थे - 1) धर्मस्थनीय (दीवानी) 2) कंटक शोधन (फ़ौजदारी)।

  • मौर्य साम्राज्य में विधि के निम्न स्रोत होते थे:- 1) धर्म, 2)व्यवहार, 3)चरितम अवम 4)राजकीय घोषणाएँ 

  • अशोक के काल में जनपदीय न्यायालय के न्यायधीशों को राजुक कहा जाता था।

  • राजकीय भूमि अथवा सरकारी भूमि को "सीता भूमि" की संज्ञा दी जाती थी।

  • बिना वर्षा के अच्छी फसल देने वाली भूमि को अशोक के समय में "अदेवमातृक" कहा जाता था। 

  • मेगस्थनीज के अनुसार अशोक कालीन भारतीय समाज का वर्गीकरण निम्न प्रकार होता था:- 
    दार्शनिक, किसान, कारीगर, अहीर, सभासद, सैनिक, निरीक्षक और गुप्तचर

  • अशोक एक समय में बिक्री कर के रूप में मूल्य का 10 वां भाग वसूला जाता था। 

  • इस कर की चोरी करने वाले या किसी प्रकार से इसे छुपाने वाले या बचाने वालों को मृत्युदंड की व्यवस्था थी। 

सम्राट के उत्तराधिकारी 

  • मौर्य शासन 137 वर्षों तक कायम रहा था। 

  • अशोक की मृत्यु  के बाद उसके किसी भी उत्तराधिकारी में इतनी योग्यता न थी की वह मौर्य साम्राज्य का संचालन कुशलता से कर योग्यता से कर पाएं। 

  • इस कारण मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया। 

  • अशोक के उत्तराधिकारी "कुणाल" ने 8 वर्षों तक शासन किया था। 

  • कुणाल के बाद "दशरथ" ने 10 वर्षों तक तक शासन किया था। 

  • दशरथ के बाद सम्प्रति, शालिशुक, देववर्मन व् शतधनुष शासक हुए। 

  • मौर्य वंश का अंतिम शासक "बृहद्रथ" था। 

  • 185 ई पू उसके सेनापति "पुष्यमित्र शुंग" ने उसकी हत्या कर राजगद्दी हथिया ली थी।  

  • "बृहद्रथ"  की मृत्यु के साथ ही मौर्य साम्राज्य और मौर्य वंश का भी अंत हो गया था।