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बौद्ध धर्म (Buddhism) - Part II 

  • "अष्टांगिक मार्ग" का सम्बन्ध बौद्ध धर्म से है। 

  • बौद्ध धर्म के त्रिरत्न इस प्रकार हैं - बुद्ध, धम्म एवं संघ। 

  • बुद्ध के प्रवचन / उपदेश "पाली भाषा" में थे। 

  • बौद्ध धर्म "ईश्वर और आत्मा" में विश्वास नहीं करता है। 

  • बौद्ध धर्म के अनुसार मोक्ष इस जीवन में भी सम्भव है  उसके लिए "मृत्यु" आवश्यक नहीं है। 

  • बौद्ध धर्म का विभाजन दो भागों में चतुर्थ बौद्ध संगीति के पश्चात हो गया था। 

  • बौद्ध धर्म का विभाजन दो भागों में हुआ वे हैं - हीनयान और महायान। 

  • बुद्ध की पहली मूर्ति और ईश्वर के रूप में बुद्ध को पूजने की परम्परा "महायान" शाखा से शुरू की थी। 

  • महायान शाखा स्वर्ग और नर्क में विश्वास करता है। 

  • बोध गया के "बोधि वृक्ष" को बंगाल के शासक "शशांक" ने कटवा दिया था। 

  • महायान शाखा का पोषक शासक निम्नवत हैं - कनिष्क और  हर्षवर्धन। 

  • आजीवक सम्प्रदाय के प्रवर्तक "मक्खलि पुत्र - घोषाल" थे। 

  • बौद्ध धर्म की पुस्तक "अंगुत्तरनिकाय" में प्रथम बार 16 महाजनपदों का वर्णन मिलता है। 

  • बुद्ध की पहली मूर्ति "मथुरा कला" में बनी थी। 

  • बौद्ध धर्म का प्रथम लक्ष्य "निर्वाण" की प्राप्ति है। 

  • गौतम बुद्ध की अधिकतर मूर्तियाँ "गांधार शैली" में बनी थीं। 

  • निर्वाण का शाब्दिक अर्थ होता है - "दिए का बुझ जाना" अर्थात " जीवन - मरण के चक्र से मुक्त हो जाना" ।

  • "धार्मिक जुलूसों" की शुरुआत सबसे पहले बौद्ध धर्म के द्वारा ही हुई थी। 

  • बौद्धों का पवित्र त्यौहार "वैशाख पूर्णिमा" है। 

  • "वैशाख पूर्णिमा" को "बुद्ध पूर्णिमा" के नाम से भी जाना जाता है। 

  • "वैशाख पूर्णिमा" बौद्ध धर्म में इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्यों की बुद्ध से सम्बंधित सभी घटनाएं जैसे - जन्म, ज्ञान की प्राप्ति, महापरिनिर्वाण आदि इसी  दिन घटित हुई थी। 

  • जातक कथाओं के अनुसार "बोधिसत्व" के रूपमें पुनर्जन्मों की श्रृंखला के तहत बुद्ध ने "शाक्य मुनि" के रूप में जन्म प्राप्त किया। 

  • जातक कथाओं के अनुसार "मैत्रेय" और "अनाम - बुद्ध का अवतार" होना अभी बाकी है। 

  • पाली भाषा में लिखे गए "त्रिपिटक" से बौद्ध धर्म के विषय में विशद ज्ञान मिलता है। 

  • त्रिपिटक "पाली भाषा' का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है - तीन टोकरियाँ। 

  • बौद्ध धर्म में तीन त्रिपिटक हैं - 

  1. सुत्तपिटक (संस्कृत - सूत्रपिटक) - इसमें बौद्ध धर्म के मूल सिद्धान्तों का वर्णां है। 

  2. विनयपिटक - (संस्कृत और पाली दोनों भाषाओँ का शब्द) - इसमें पुरुष और महला सन्यासियों सम्बन्धी कानूनों का वर्णन है।  इसके तीन विभाग है - सुत्त विभाग, खुद्धक और परिवार। 

  3. अभिधम्मपिटक - इसमें बौद्ध दर्शन / तत्व ज्ञान का वर्णन है। 

  • बुद्ध की मृत्यु के पश्चात उनका अंतिम संस्कार "मल्लों" ने सम्मानपूर्वक किया था। 

  • महत्मा बुद्ध द्वारा दिया गया अंतिम उपदेश था - "सभी वस्तुएं क्षरणशील होती है अतः मनुष्य को अपना पथ प्रदर्शक स्वयं होता है" । 

  • बौद्ध धर्म में दीक्षित होने वाले बुद्ध के पांच शिष्यों में एक थे - "अस्सजि" । 

  • सम्राट अशोक को बौद्ध धर्म में दीक्षित करने वाले बौद्ध गुरु थे, "मोग्लिपुत्त तिस्स (उपगुप्त)" । 

  • भारत से बाहर बौद्ध धर्म को फ़ैलाने का श्रेय "सम्राट अशोक" को जाता है। 

  • अशोक ने अपने पुत्र "महेंद्र" और पुत्री "संघमित्रा" को श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार कार्य हेतु भेजा था। 

  • बुद्ध के प्रथम अनुयायी "कल्लिक शूद्र" और "तपासू" थे। 

  • बौद्ध धर्म "अनीश्वरवाद" में विश्वास रखता था। 

 

बुद्धकालीन गणराज्य और सम्बन्धित राजधानी :- 

  • विदेह  (राजधानी - मिथिला)

  • लिच्छवि (राजधानी - वैशाली)

  • शाक्य (राजधानी - कपिलवस्तु)

  • कोलिय (राजधानी - रामग्राम)

  • मोरिया (राजधानी - पिप्पलिवन)

  • मल्ल (राजधानी - कुशीनारा)

  • कालाम (राजधानी - करुपुत्र)

  • बुली (राजधानी - अल्लकप्प)

  • मग्ग (राजधानी - सुमसुमारगिरि)

 

बुद्ध के धार्मिक आंदोलन निम्नवत हैं :- 

  • नित्यवादी (संस्थापक - पकुधकच्चायन)

  • संदेहवादी (अज्ञेयवादी, अनिश्चयवादी) (संस्थापक - संजय बेलट्ठपुत्र)

  • आजीविक सम्प्रदाय (भाग्यवादी) (संस्थापक - मक्खलिगोशाल)

  • घोर अक्रियावादी (संस्थापक - पूरन कश्यप)

  • उच्छेदवादी (यदृच्छावाद) (संस्थापक - आचार्य अजीत)

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