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विदेशी यात्रियों / तीर्थयात्रियों के विवरण (Details of foreign travelers / Pilgrims) : चीनी यात्री / लेखक 

फाह्यान (399 - 414 ई०)

  • यह चीनी यात्री गुप्त वंश के शासक चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत भर्मण हेतु आया था। 

  • फाह्यान भारत में 15 वर्षों तक रहा और भारत की सैर की जिसका विवरण उसने अपनी पुस्तक "भारत की दशा का विवरण" में किया था। 

  •  इस पुस्तक के माध्यम से फाह्यान ने भारतीय समाज, राजीति, संस्कृति व अन्य अवस्थाओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया। 

  • फाह्यान ने अपनी पुस्तक में "मध्यप्रदेश" की जनता को सभ्य, सुसंकृत और सुखी बताया था। 

 

ह्वेनसांग (युवान - च्यांग) (629 - 645 ई० ) 

  • यह भी भारत में करीबन 15 वर्षों तक रहा। 

  • चीनी  यात्रियों में इसे सर्वाधिक उल्लेखनीय माना जाता है। 

  • यह सम्राट "हर्षवर्धन" के दरबार में आया था। 

  • उसने बिहार के नालंदा जिला स्थित "नालंदा विश्वविधालय" में कई वर्षों तक अध्ययन किया और अपनी पुस्तक में  इस विश्विधालय के परिवेश व् सुंदरता का से विवरण किया। 

  • वह चीन लौटते समय अपने साथ कुछ बौद्ध ग्रंथों  को भी ले गया था। 

  • ह्वेनसांग ने अपने यात्रा का वर्णन "सी - यू  - की" नामक पुस्तक में किया। 

  • "सी - यू  - की" पुस्तक में 138 देशों का सुन्दर विवरण उपलब्ध है।  

  • उसने अपनी पुस्तक में "हर्ष" कालीन समाज, धर्म व  राजनीति का विस्तार से विवरण किया है। 

  • उसकी पुस्तक के अनुसार उस समय "सिंध" का राजा "शूद्र" था। 

  • ह्वेनसांग के नालंदा विश्वविधालय अध्ययन के समय विश्वविधालय के कुलपति "आचार्य शीलभद्र" थे।  

संयुगन :

  • भारत की यात्रा को 518 ई० में आया था। 

  • यह तीन वर्षों तक भारत में रहा। 

  • लौटते समय उसने बौद्ध धर्म की प्राप्तियां एकत्र की और भारत भ्रमण का वर्णन अपनी पुस्तक में प्रस्तुत की। 

इत्सिंग :

  • 7 वीं शादी के अंत में भारत आया था। 

  • वह काफी समय तक बिहार स्थित "विक्रमशिला" और "नालंदा विश्वविधालय" में रहा। 

  • उसने अपनी पुस्तक के माध्यम से इस विश्वविधालयों के अतिरिक्त तत्कालीन भारत का विशद विवरण प्रस्तुत किया। 

 

मात्थान लीन :

  • इसने हर्ष के पूर्वी अभियान की जानकारी उपलब्ध कराई। 

 

चाऊ - जू - कुआ :

  • यह भी एक प्रसिद्ध चीनी यात्री था। 

  • वह दक्षिण भारत पहुंचा था। 

  • उसने चोलकालीन शासन -  व्यवस्था पर काफी जानकारी उपलब्ध करायी।