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मानव निर्मित पदार्थ 

1. संश्लेषित रेशा (Synthetic Fibers): जैसे - रेयॉन, नाइलॉन और पॉलिएस्टर 

 

(a) रेयॉन :-

  • वनस्पतियों से प्राप्त सेलुलोस में NaOH एवं CS2 मिलकर विस्कास नामक गाढ़ा द्रव बनाया जाता है पुनः इसमें H2 SO4 प्रवाहित करने से रेयॉन की प्राप्ति होती है।

  • उपयोग:- टायर कार्ड, दरियाँ, चिकित्सा क्षेत्र में लिट् या जाली बनाने में। 

(b)नायलॉन :-

  • सर्वप्रथम 1935 में न्यूयॉर्क एवं लंदन (Ny + Lon) के वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया पहला संश्लेषित रेशा था। 

  • उपयोग:- वस्त्र, पेंटब्रश, जाल, रस्सी, पैराशूट, टायर इत्यादि  बनाने में होता है। 

(c) पॉलिएस्टर:-

  • ईस्टर (OH+COOH - COO + H2O) के बहुलक को पॉलिएस्टर कहते हैं। 

  • उपयोग:- वस्त्र, साड़ियां, पर्दे, अग्निशमन के लिए प्रयुक्त हॉज बनाने में। 

2. प्लास्टिक (Plastic):- लाह एक प्राकृतिक प्लास्टिक का उदहारण है। 

 

कृत्रिम प्लास्टिक दो प्रकार का होता है -

(a) ऊष्मा दृढ़ (Thermoplastic):-

  • यह गर्म करने पर मुलायम और ठंडा करने पर कठोर हो जाता है। 

 

यह भी दो प्रकार का होता है - 

  • पॉलीथिन:- इथीलीन (C2H4) का बहुलक। 

  • उपयोग:- बाल्टी, बोतल, ट्रे डाट इत्यादि बनाने में। 

  • टेफ्लॉन:- टेट्राफ्लोरो इथीलीन (C2H4) का बहुलक। 

  • उपयोग:- अम्ल एवं क्षाररोधी बर्तन बनाने में। 

 

b) ताप दृढ़ प्लास्टिक (Thermosettiny Plastic):-

  • यह प्लास्टिक एक ही बार गर्म करने पर मुलायम होता है, दुबारा गर्म करने पर कड़ा ही रहता है। 

  • उपयोग:- बिजली के सामान, रेडियो, टीवी के कैबिनेट,फोन के रिसीवर,मोटर के पार्ट पुर्जे बनाने में। 

 

3. रबर:- प्राकृतिक रबर आइसोप्रीन का बहुलक होता है। 

 

संश्लेषित रबर:- सर्वप्रथम 1910 में मैथ्यूस एवं हेरिस ने आइसोप्रीन के साथ सोडियम के सम्पर्क में 60 डिग्री सेल्सियस पर गर्म कर बनाया था।

संश्लेषित रबर निम्न प्रकार का होता है :- 

  • बुना- N-रबर:- ब्यूटाडाइन (CH2 = CH-CH = CH2) का बहुलक। 

  • बुना- S-रबर:- ब्यूटाडाइन एवं स्टाइरीन का बहुलक। 

  • पॉलीस्टाइरीन:- टाइरीन का बहुलक। 

  • ड्यूप्रिन रबर:- विनाइल एसिटिलीन एवं HCl से अभिक्रिया कराने पर क्लोरोप्रीन बनता है। इसी का बहुलक ड्यूप्रिन रबर है। 

  • नियोप्रिन - 2:- क्लोरोब्यूटाडाइन का बहुलक। 

  • थियोकॉल रबर:- 1, 2, डाइक्लोरो इथेन की अभिक्रिया सोडियम पॉलीसल्फाइड से करने पर थियोकॉल रबर प्राप्त होता है। 

  • पॉलीविनाइल क्लोराइड :- वाइनिल क्लोराइड का बहुलक। 

साबुन एवं अपमार्जक 

उच्च वसा अम्लों जैसे -

पामिटिक अम्ल (C15H31COOH), स्टीएरिक अम्ल (C17H35COOH), ओलीइक अम्ल (C18H37COOH) इत्यादि सोडियम लवणों को साबुन कहते हैं। 

  • साबुन बनाने की क्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं। 

  • सोडियम लवणों (NaOH) से बने साबुन कपडा धोने के काम आते हैं। 

  • पोटैशियम लवणों (KOH) से साबुन स्नान करने के काम आते हैं। 

  • साबुन रहित साबुन अपमार्जक (Detergents) कहलाते हैं। 

  • इसका आविष्कार सर्वप्रथम जर्मनी में प्रथम विश्वयुद्ध के समय हुआ था। 

  • अपमार्जक के उदाहरण हैं:- सोडियम एल्काइल सल्फोनोएट, सोडियम एल्काइल और बेजिन सल्फोनोएट। 

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