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राष्ट्रीय जनगणना 2021 

प्रमुख कार्य

राष्ट्रीय जनगणना करना तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) को अध्यतन (Update) करना 

 

 

16वीं जनगणना

जनगणना देश में नागरिकों के लिये योजना बनाने हेतु आधार प्रदान करती है। वर्ष 2021 की जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना होगी। भारत की जनगणना प्रकिया विश्व में अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना है।

जनगणना 2021 का विषय (थीम) “जन भागीदारी से जनकल्याण” है

 

प्रक्रिया :- 

 

जनगणना का कार्य निम्न कुल 2  चरणों में पूर्ण किया जायेगा  - 

  1. पहला चरण :- अप्रैल - सितंबर 2020 तक, देश के प्रत्येक हिस्से में प्रगणक (जनगणनाकर्मी) घरों की सूची (House Listing) और उसमें रहने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों के (Housing Census) आँकड़े एकत्रित करेंगे।
    इसके साथ ही असम को छोड़ कर देश के अन्य सभी राज्यों में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने का काम भी किया जाएगा।

  2. दूसरा चरण :- 9 - 28 फरवरी 2021 तक, पुरे देश की जनगणना को कार्य संपन्न किया जायेगा। 

 

16वीं जनगणना में प्रत्येक परिवार से 31 प्रश्नों के आधार पर नागरिकों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति से संबंधित आँकड़ों को एकत्रित किया जाएगा।

 

 

जनगणना में कुल व्यय :-

  1. जनगणना की प्रक्रिया पर कुल व्यय होगा :- 8754.23 करोड़ रूपए। 

  2. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) को अध्यतन करना (Update)  की प्रक्रिया पर कुल व्यय होगा :- 3941.35 करोड़ रूपए। 

 

जनगणना में कर्मियों की कुल संख्या :-

30 लाख कर्मियों की तैनाती होगी (2011 में 28 लाख कर्मि लगे थे)

देश के विभिन्न राज्यों (असम को छोड़कर) के सरकारी कर्मचारी जैसे- निगमों के कर्मचारी, शिक्षक एवं अन्य विभागों के पदाधिकारीगण जनगणना प्रक्रिया में योगदान देंगे।

 

 

जनगणना 2021 की विशेषता :-

 

2021  की जनगणना में पहली बार आंकड़ों के संकलन के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाएगा। 

 

Important Note :- 

नागरिकता कानून 1955 व् नागरिकता अधिनियम 2003, के तहत राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर (NPR) पहली बार 2010  में त्यार किया गया था, तथा आधार से सम्बद्ध किया जाने के पश्चात इसका अद्यतन 2015 में किया गया था। ताजा अध्यतन राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) का 2021 की जनगणना आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। 

 

जनगणना क्रम :- देश की 16वीं (1872 से शुरू)  तथा  स्वतंत्र भारत की 8वीं  जनगणना 

 

 

जनगणना 2021 की विशेषताएँ:वर्ष 1872 में शुरू हुई जनगणना प्रक्रिया में समय के अनुरूप कई परिवर्तन हुए हैं, जनगणना 2021 पूरी तरह से कागज़ रहित होगी और जनसंख्या के आँकड़ों के संग्रहण तथा वर्गीकरण की प्रक्रिया पूर्णतया डिज़िटल होगी।

  • जनगणना की प्रक्रिया में सरकार द्वारा जारी एक मोबाइल एप का प्रयोग किया जाएगा।

  • इस एप द्वारा 16 भाषाओं में जानकारी दी जा सकती है, इस जानकारी का वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाएगा।

  • जनगणना की प्रक्रिया को सुगम बनाने एवं इसकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिये जनगणना निगरानी और प्रबंधन पोर्टल की व्यवस्था की जाएगी।

  • इस पोर्टल के माध्यम से जनगणना में लगे कर्मचारियों और पदाधिकारियों को कम समय तथा अलग-अलग भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी।

  • जनगणना हेतु कार्यरत कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिये राज्य एवं राष्ट्र स्तरीय प्रशिक्षण संस्थाओं की सहायता ली जाएगी।

  • लोगों द्वारा स्वेच्छा से जनसांख्यिकी आँकड़े उपलब्ध कराने के लिये ऑनलाइन सुविधा दी जाएगी।

  • जनगणना से प्राप्त आँकड़ों को कूटबद्ध कर उनके प्रसंस्करण में समय की बचत करने के लिये कोड डायरेक्टरी की व्यवस्था की जाएगी।

  • मंत्रालयों के अनुरोध पर जनसंख्या से जुड़ी जानकारियाँ सही, मशीन में पढ़े जाने लायक और कार्रवाई योग्य प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएंगी।

  • इसके साथ ही जनगणना हेतु कार्यरत कर्मचारियों को मानदेय के रूप में दी जाने वाली राशि को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराए जाने की व्यवस्था की गई है

 

 

जातिगत जनगणना का मुद्दा:

वर्ष 1872 के बाद प्रत्येक जनगणना में धर्म और जाति से संबंधित सवाल पूछे जाते थे परंतु स्वतंत्रता के पश्चात् जनगणना में जातिगत सवालों को पूछना बंद कर दिया गया। ऐसा इसलिये क्योंकि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार का मानना था कि भारत एक आधुनिक लोकतंत्र बन चुका है और जाति जैसी आदिम पहचान के आधार पर लोगों की गिनती करना उचित नहीं है। सरकार का यह भी मानना था कि जाति की गिनती नहीं होने से जाति एवं जातिवाद समाप्त हो जाएगा।

  • वर्ष 1941 में जाति से जुड़े प्रश्न पूछे गए परंतु द्वितीय विश्व युद्ध के कारण आँकड़े संकलित नहीं हो पाए थे।

  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वर्ष 1951 से लेकर वर्ष 2011 तक जाति की गिनती नहीं की गई। वर्ष 2011 की जनगणना से पहले जाति आधारित गणना न होने के बावजूद प्रत्येक जनगणना में जाति से संबंधित कुछ प्रश्न शामिल थे, जैसे- अनुसूचित जाति से संबंधित लोगों की जनसंख्या की जानकारी।

  • संविधान में अनुसूचित जाति को आबादी के अनुपात में राजनीतिक आरक्षण देने का प्रावधान है, अतः उनकी आबादी जानना एक संवैधानिक ज़रूरत है।

  • अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class - OBC) को कितना आरक्षण देना है इस प्रश्न पर भी जनगणना के ज़रिये आँकड़े जुटाने की सिफारिश हुई।

  • देश में जाति आधारित विश्वस्त जनगणना आँकड़ों के अभाव में मंडल कमीशन (1979) ने विवश होकर वर्ष 1931 की जनगणना के आँकड़ों से काम चलाया और देश में जनगणना के दौरान जातिगत आँकड़ों को भी इकट्ठा करने का सुझाव दिया।

  • मंडल कमीशन की रिपोर्ट वर्ष 1991 में लागू हो गई थी परंतु कमीशन के सुझाओं के अनुरूप वर्ष 2001 की जनगणना में जातिगत आँकड़ों को नहीं जोड़ा गया।

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