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जंतु - विज्ञान (Zoology)

 जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें जंतुओं तथा उनके कार्यकलापों का अध्ययन किया जाता है जंतु विज्ञान कहलाता है। 

 

जंतु - जगत का वर्गीकरण 

  • जंतुओं के वर्गीकरण (Classification of Animalia) का सबसे पहला प्रयास ग्रीक दार्शनिक एवं विद्वान अरस्तू (Aristotal) ने किया था, इसी कारण इन्हें "जंतु विज्ञान का पिता" (Father of Zoology) कहा जाता है।

  • अरस्तू ने जंतुओं को दो भागों में बांटा, जो निम्नवत हैं :- 

  • एनाइमा (ANAIMA): इस वर्ग में वे जंतु रखे गए जिनमें लाल रक्त नहीं पाया जाता है। 

  • जैसे :- स्पंज, आर्थोपोडा, मोलस्का इत्यादि। 

  • इनाइमा (ENAIMA): इस वर्ग में वे जंतु रखे गए जिनमें लाल रक्त पाया जाता है।

  • जैसे :- मछली, मेंढक, सरीसृप, पक्षी एवं स्तनधारी इत्यादि। 

 

स्टोरर एवं यूसीनजऱ के अनुसार जंतुओं का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया गया :- 

 

इन्होने जंतु जगत को दो भागों में बांटा, जो है :- 

प्रोटोज़ोआ (Protozoa) - एककोशीय जंतु (Unicellular)

मेटज़ोआ (Metazoa) - बहुकोशीय जंतु (Multicellular)

A.) प्रोटोज़ोआ (Protozoa):- (Protos - first, Zoon - Animal)

  • इसे एक ही संघ पप्रोटोजोआ में बांटा गया है।

  • इसके सामान्य लक्षण निम्नवत हैं :-

  • यह एककोशीय होती है। 

  • प्रोटोजोआ नाम गोल्डफ़्स ने 1820 में दिया था। 

  • जीवद्रव्य दो भागों में बंटा रहता है - Ecotoplasm एवं Endoplasm 

  • प्रचलन कूटपाद (Pseudopodia), फ्लैजिला एवं सिलिया के द्वारा होता है। 

  • स्वतंत्रजीवी एवं परजीवी दोनों होता है। 

 

B.) मेटाजोआ (Metazoa) :

इसे निम्नलिखित कई संघों में बांटा गया है :- 

 

Phylum I : Porifera (Porous - Pore, Ferre - To bear)

  • R.E.Grant ने इस संघ का नाम पोरिफेरा रखा, जिसके सामान्य लक्षण :

  • यह पौधे की तरह स्थायी होता है। 

  • अधिकांश समुद्र में, कुछ मीठे पानी में भी पाया जाता है, जैसे - स्पौंजीला। 

  • शरीर पर अनेक छिद्र (Ostia) उपस्थित रहते हैं। 

  • उदाहरण :- साइकॉन, यूपलेकटेला, स्पौंजीला इत्यादि। 

  • इस संघ के जंतुओं को सामन्यतः स्पंज (Sponge) भी कहा जाता है।  

  • स्पंज का उपयोग ध्वनि के अवशोषण में होता है। 

  • यूपलेकटेला को वीनस फूलों की टोकरी भी कहा जाता है। 

  • जिसे जापान में उपहारस्वरूप भेंट देने की परंपरा रही है। 

 

Phylum II : Coelenterata - (Kolios - Hollow Enteron - Intestine)

  • यह जलीय जंतु  हैं जो समुद्र एवं मीठे पानी दोनों जगहों में पाया जाता है। 

  • इसका शरीर द्विस्तरीय (Diploblastic) होता है। 

  • शरीर के बीच में एक गुहा (Cavity) होती है, जिसे Coelenterata कहते हैं, यह एक ही छिद्र द्वारा बाहर खुलता है, जो Anus एवं Mouth दोनों का कार्य करता है। 

  • मुख के चारों ओर लम्बी और पतली रचनाएं पायी जाती है, जिन्हें स्पर्शक (Tentacles) कहते हैं। 

  • उदाहरण - हाइड्रा, जेलीफिश, सी - फैन, मूँगा इत्यादि। 

Phylum III : Platyheiminthes - (Platy - flat, Helminthes - Worms)

  • स्वतंत्रजीवी एवं परजीवी दोनों होता है।

  • शरीर  पृष्ट आधार दिशा (Dorso - ventrally) में चपटा होता है। 

  • शरीर भित्ति तीन स्तर (Triploblastic) की बनी होती है परन्तु देहगुआ (Coelom) अनुपस्थित होती है। 

  • उदहारण:- प्लेनेरिया, फीताकृमि, लिवर फ्लूक इत्यादि। 

Phylum IV : Aschehelminthes - (Nematoda) (Nemators - Thread)

  • शरीर त्रिस्तरीय एवं बेलनाकार एवं अखंडित होता है। 

  • आहारनाल स्पष्ट होता है, जिसमें मलद्वार (Anus) और मुख (Mouth) दोनों पाया जाता है। 

  • उतसर्जन प्रोटोनेफ्रीडिया द्वारा होता है। 

  • सामान्यतः एकलिंगीं होता है। 

  • जैसे:- गोलकृमि (एस्केरिस), बुचेरिया (फाइलेरियल वर्म) इत्यादि। 

 

Phylum V : Annelida - (Anneus - Little ring cids - Form)

  • शरीर पतला, लम्बा, त्रिस्तरीय, द्विपार्श्वसममित एवं खण्डों में बंटा होता है। 

  • त्वचा के ऊपर क्यूटिकल का स्तर पाया जाता है। 

  • प्रचलन कंटक (Setae) या चूषक (Suckers) के सहारे होता है। 

  • उतसर्जन वृक्क (Kidney) के द्वारा होता है। 

  • सामनायतः एक लिंगीं या द्विलिंगीं दोनों होते हैं। 

  • जैसे:- केंचुआ, जोंक,नेरिस इत्यादि। 

 

Phylum VI : Arthropoda (Arthros Jointed, Podas - Foot)

  • यह जंतु साम्राज्य का सबसे बड़ा संघ है। 

  • यह जल, स्थल और वायु सभी जगहों पर पाया जाता है। 

  • इसी संघ के अंतर्गत सम्मिलित वर्ग इंसेक्टा, जंतु  साम्राज्य का सबसे बड़ा वर्ग है। 

  • शरीर - सिर (Head), वक्ष (Thorax) एवं उदर (Abdomen) भागों में बंटा रहता है। 

  • इसके पैर संघियुक्त (Jointed) होता हैं। 

  • सभी जंतु एकलिंगी होते हैं। 

  • रक्त परिवहन तंत्र खुले प्रकार का होता है। 

  • जैसे:- कॉकरोच, तिलचट्टा, झींगा मछली, केकड़ा, मक्खी, मच्छर इत्यादि। 

 

Phylum VII : Mollusca (Molis - Soft)

  • शरीर कोमल तथा पतली झिल्ली मेन्टल (Mental) द्वारा ढका रहता है। 

  • मेन्टल के चारों ओर कवच पाया जाता है जो सामान्यतः चुना पत्थर का बना होता है। 

  • समुद्र एवं मीठे जल दोनों जगहों पर पाए जाते हैं। 

  • रक्त रंगहीन होता है। 

  • शरीर Hear, foot  एवं Visceral Mass (आंतरंग पुंज) में बंटा रहता है। 

  • जैसे:- शंख, शैतान मछली (Octopus), कटलफिश इत्यादि। 

 

Phylum VIII : Echinodermata (Echinos - Spines, Derma - Skin)

  • सभी जंतु समुद्र में पाए जाते हैं। 

  • शरीर में जलपरिवहन तंत्र पाया जाता है। 

  • पुनरुदभवन (Regeneration) की  क्षमता पायी जाती है। 

  • नर और मादा अलग - अलग  होते हैं। 

  • जैसे;- तारा मछली, समुद्री खीरा, समुद्री अर्चिन इत्यादि। 

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