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श्वसन तंत्र (Respiratory System)

  • श्वसन एक अपचय अभिक्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन की सहायता से जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल कार्बनिक पदार्थों में तोडा जाता है तथा ऊर्जा का निर्माण होता हैं और अंत में CO2 गैस मुक्त होती है। 

 

श्वसन क्रिया में भाग लेने वाले अंग निम्नवत हैं :- 

  • बाह्य नासिका रंध्र (External Nostril),

  • नासिका मार्ग (Nasal Chamber),

  • अन्तः नासिका रंध्र (Internal Nostril), फैरिंक्स, लैरिंक्स, कंठ, ट्रैकिया, ब्रोंकाइ तथा फेफड़े। 

  • बाह्य नासिका छिद्र मिजेथमबाइड नामक हड्डी के द्वारा दो भागों में बंटा रहता है। 

  • मनुष्य के दाएं फेफड़े का वजन 625 ग्राम और बाएं फेफड़े का वजन  567 ग्राम होता है। 

श्वसन की क्रिया 

श्वसन की क्रिया को चार भागों में बनता जा सकता है :- 

i) बाह्य श्वसन (External Respiration)

ii)  गैसों का परिवहन (Transportation of Gases)

iii) आतंरिक श्वसन (Internal Respiration)

iv) कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration)

 

i) बाह्य श्वसन (External Respiration)

 

बाह्य श्वसनको दो भागों में बांटा जाता है -

 

a) श्वासोच्छ्वास (Breathing) 

  • वायु ग्रहण करने और छोड़ने की क्रिया को श्वासोच्छ्वास कहते हैं। 

  • वायु ग्रहण करने की क्रिया निःश्वसन (Inspiration) और छोड़ने की क्रिया उछ्श्वसन  (Expiration) कहलाती हैं। 

b) गैसों का विनिमय (Exchange of Gases)

  • गैसों का विनिमय फेफड़ों के  भीतर होता है।

  • यह विनिमय घुली अवस्था में विसरण प्रवणता के आधार पर साधारण विसरण के द्वारा होता है। 

  • श्वासोच्छ्वास (Breathing) की क्रिया में पूरी वायु को ग्रहण किया जाता है न की सिर्फ ऑक्सीजन को। 

  • सांस द्वारा लगभग 400 ml पानी प्रतिदिन हमारे शरीर से बाहर निकलता है। 

 

ii) गैसों का परिवहन

  • ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्सआइड को फेफड़ों से शरीर के विभिन्न कोशिकाओं तक पहुंचना तथा पुनः फेफड़ों तक वापस लाने की प्रक्रिया गैसों का परिवहन कहलाती है।

  • ऑक्सीजन का परिवहन रक्त हीमोग्लोबिन के द्वारा ऑक्सिहिमोग्लोबिन के रूप में होता है।

  • कार्बन डाइऑक्सआइड का परिवहन भी हीमोग्लोबिन के द्वारा होता है लेकिन केवल 10 से 20 % तक ही शेष परिवहन निम्न प्रकार से होता है:- 

  1. प्लाज़मा में घुलकर: CO2  प्लाज़मा में घुलकर कार्बोनिक अमल बना लेती है और इस रूप में 7% कार्बन डाईऑक्साइड का परिवहन होता है।

  2. बाइकर्बोनेट्स के रूप में: रक्त के सोडियम और पोटेशियम के साथ मिलकर कार्बन डाईऑक्साइड, बाइकर्बोनेट्स बनाता है, इस रूप में कार्बन डाईऑक्साइड का 70% का परिवहन होता है।

 

  • मानव शरीर में लगभग 100 - 200 C. C. कार्बन डाईऑक्साइड प्रत्येक मिनट बनती है।

  • आंतरिक श्वसन: कोशिका शरीर के अंदर रक्त एवम ऊतक द्रव्य के बीच गैसीय विनिमय होता है, उसे आंतरिक श्वसन कहते हैं।

  • कोशिकीय श्वसन:  कोशिका के अंदर की वे समस्त क्रियाएं, जिनके द्वारा ऊर्जा उत्पन  होती है, कोशिकीय श्वसन कहलाती है।

  • ग्लूकोस के ऑक्सीकरण द्वारा निम्न प्रकार से ऊर्जा प्राप्त होती है:- 

  • C6H12O6 + 6O2 - 6CO2 + 6H2O + 686 K. Cal ऊर्जा

  • ग्लूकोस का कार्बन डाईऑक्साइड एवम जल में परिवर्तन तथा ऊर्जा का निर्माण 20 प्रतिक्रियाओं के उपरांत है जिसे तीन समूहों में बांटा गया है :- 

  • a) गलीकॉलाइसिस b) क्रेब्स चक्र c) इलेक्ट्रान परिवहन तंत्र

 

a) गलीकॉलाइसिस (Glycolysis)

  • इसका अर्थ ग्लूकोस का विखंडन होता है।

  • इसका अध्ययन सर्वप्रथम एम्ब्डेन, मेयरहॉफ और पार्सन ने किया था। इसी कारण इसे EMP पथ भी कहते हैं।

  • यह पूरी अभिक्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कोशिका द्रव्य में सम्पन्न होती है। इसे श्वसन का अन ऑक्सी चरण भी कहते हैं।

  • गलीकॉलाइसिस क्रिया द्वारा ग्लूकोस के एक अणु के विघटन के फलस्वरूप पाइरुविक अम्ल के दो अणु बनते हैं।

  • इस प्रक्रिया द्वारा 4 अणु ATP प्राप्त होता है, परन्तु 2 ATP इसी प्रक्रिया में खर्च हो जाते हैं।

  • अतः 2 ATP का लाभ होता है।

  • इसी प्रक्रिया में हाइड्रोजन के चार अणु प्राप्त होते है, NAD को 2NADH2 में बदलकर ETS में प्रवेश कर जाता है और 4 ATP ऊर्जा मुक्त होती है।

 

b) क्रेब्स चक्र

  • यह अभिक्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकोन्ड्रिया में सम्पन्न होती है।

  • अतः इसे ऑक्सी चरण भी कहते हैं।

  • इसे एसिड चक्र या ट्राई कार्बोकसीलिक चक्र भी कहते हैं।

  • इसका विवरण सर्वप्रथम  सर हेन्स एडीलफ़ क्रेब्स ने 1837 में किया था।

  • यह क्रिया Acetyle-co-A तथा Oxaloacetic Acid से शुरू होता है।

  • ग्लूकोस के एक अणु में पाइरुविक अमल के दो अणु बनते हैं, अतः दो क्रेब्स चक्र एक साथ चलते हैं।

  • ऑक्सीजन की कमी या अनुपस्थिति होने पर  पाइरुविक अमल लैक्टिक अमल एवम इथाइल ऐल्कोहॉल में परिवर्तित हो जाता है।

  • प्रत्येक क्रेब्स चक्र के द्वारा कार्बन डाईऑक्साइड के दो अणु तथा हाइड्रोजन के 8 अणु मुक्त होते हैं।

  • कार्बन डाईऑक्साइड मुक्त होने की क्रिया डिकार्बोक्सीलेसन एवम हाइड्रोजन मुक्त होने की क्रिया डीहयड्रोजिनेशन कहलाती है।

  • एक क्रेब्स चक्र के द्वारा कुल 12 ATP ऊर्जा का निर्माण होता है। एक ही साथ दो चक्र चलता है। अतः कुल 24 ATP ऊर्जा बनती है।

 

c) इलेक्ट्रान परिवहन तन्त्र (E.T.S.)

 

क्रेब्स चक्र के ऑक्सीकरण

  • अवकरण प्रक्रियाओं में डिहाइड्रोजिनेने एन्जाइम के कारण माइटोकोन्ड्रिया के बाहरी चेम्बर में मुक्त हाइड्रोजन परमाणु प्रोटोन और इलेक्ट्रान में डट जाता है और इलेक्ट्रान माइटोकॉन्ड्रिया के भीतरी भाग में उपस्थित होता है।

  • एन्जाइम श्रृंखला से गुजरते हैं।

  • इस क्रम में बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।

  • मुक्त ऊर्जा अकार्बनिक फास्फेट से ऊर्जा युक्त फास्फेट का निर्माण करती है। जिसे  ADP से जोड़कर ATP का निर्माण करती है।

  • इस प्रक्रिया को ETS कहा जाता है।

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