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केन्द्रक अम्ल (Nucleic Acid)

  • यह केन्द्रक में पाया जाने वाला अम्ल है, जिसे न्यूक्लीन (Nuclein) भी कहा जाता है। 

  • इसकी खोज सर्वप्रथम फ्रेडरिक मिशर (Freidrich Meischer) ने किया था। 

 

केन्द्रक अम्ल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:- 

a) D.N.A. (Deoxy Ribo Nucleic Acid)

b) R.N.A. (Ribo Nucleic Acid)

 

  • D.N.A. केन्द्रक के अलावे माइटोकॉन्ड्रिया एवं लवक में भी पाया जाता है। 

  • केन्द्रक अम्ल न्यूक्लिओटाइड्स का बहुलक होता है। 

 

न्यूक्लिओटाइड्स में निम्नलिखित तीन पदार्थ उपस्थित होते हैं :- 

a) फास्फोरिक एसिड 

b) पेंटोज शर्करा यह भी दो प्रकार के होते हैं - 

I) डी - ऑक्सी राइबोज़ सूगर : केवल D.N.A. में पाया जाता है। 

II) राइबोज़ सूगर : केवल R.N.A. में पाया जाता है। 

 

c) नाइट्रोजन युक्त क्षार :

यह भी दो प्रकार की होती है :- 

i) प्यूरिन (Purine): इसके भी दो प्रकार होते हैं : एडेनिन (Adenine) एवं गुआनिन (Guanine)

ii) पाइरिमिडीन (Pyrimidine): इसके तीन प्रकार होते हैं :- साइटोसीन (Cytosine), थाइमिन (Thymine) एवं यूरेसिल (Uracil)

  • D.N.A. एक द्विकुंडलित (Double Helical) रचना है, जिसके बारे में सर्वप्रथम वाटसन और क्रीक ने बताया था। 

  • प्रत्येक कुंडली में फास्फोरिक एसिड, डिऑक्सीराइबोज सूगर एवं नाइट्रोजन युक्त क्षार उपस्थित होता है। 

  • नाइट्रोजन युक्त क्षार में एडेनिन हमेशा थायमिन के साथ (A = T) एवं साइटोसीन हमेशा गुयानिन के साथ जुड़ा रहता है। 

  • क्षार जोड़ों की बीच उपस्थित बंधन हाइड्रोजन बंधन कहलाता है। 

  • D.N.A. के साथ एक कुंडली में दस क्षार जुड़े रहते हैं। 

  • D.N.A. यूकैरियोटिक कोशिका के लिए आनुवंशिक पदार्थ का कार्य करता है तथा प्रोटीन संश्लेषण को भी नियंत्रित करता है। 

 

D.N.A. एवं R.N.A. में अंतर्