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मानव आनुवांशिकी (Human Genetic)

  • मानव आनुवांशिकी में गुणसूत्र (Chromosome) की भूमिका ही महत्वपूर्ण होती है। 

  • गुणसूत्रों में पाए जाने वाले आनुवांशिक पदार्थ को जीनोम कहते हैं। 

  • जीन इन्ही  गुणसूत्रों  पाए जाते हैं। 

  • गुणसूत्रों के अलावे कुछ जीन्स कोशिकाद्रव्य में ही पाए जाते हैं।

  • इन जीन को प्लाजमाजीन कहा जाता है। 

  • 1956 में एस. बेन्जर ने जीन के संदर्भ में आधुनिक विचार प्रकट किये हैं इनके अनुसार जीन की कार्यात्मक इकाई को Cistron, उत्परिवर्तन की इकाई को Muton एवं पुनः संयोजन की इकाई को Recon कहा जाता है। 

 

मानव में लिंग निर्धारण (Sex Determination in Human Beings) 

 

  • मनुष्यों तथा जंतुओं में लिंग निर्धारण क्रोमोसोम के द्वारा होता है। 

  • मानव की कायिक कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं। 

  • इसमें दो लिंग गुणसूत्र और 4 Autosomes कहलाते हैं। 

  • लिंग गुणसूत्रों में एक पिता एवं दूसरे  माता से प्राप्त होता है जिसे Y एवं X गुणसूत्र कहते हैं। 

  • यदि Autosomes के एक पुरे Haploid set or 22 क्रोमोसोम्स को A मान लिया जाये तो पुरुष 46 गुणसूत्र एवं दो लिंग गुणसूत्र को 2A  को 2A + XY द्वारा प्रदर्शित करते हैं। 

  • निषेचन के समय यदि अंडाणु X गुणसूत्र वाले शुक्राणु से मिलता है तो युग्मनज (Zygote) XX क्रोमोसोम उत्पन्न होगी, इससे मादा संतान होगी।

  • इससे विपरीत अंडाणु यदि Y गुणसूत्र  वाले शुक्राणु से मिलेगा तो Zygote में XY गुणसूत्र होगा और Zygote इससे नर की उत्पत्ति होगी। 

  • अतः पुरुष का Y गुणसूत्र ही संतान में लिंग निर्धारण में सहायक होता है। क्यूंकि मादा में सिर्फ क्रोमोसोम ही पाया जाता है। 

  • नोट:- परखनली शिशु के मामले में परखनली के अंदर ही निषेचन होता है। 

  • Evolution का अर्थ होता है "घटनाओं को क्रमशः उजागर करना " Unrolling or Unfolding of Events is called Evolution" 

  • इस परिभाषा को सर्वप्रथम हरबर्ट स्पेंसर ने दिया था। 

  • चार्ल्स डार्विन के अनुसार वंशक्रम में परिवर्तन को ही Evolution कहते हैं। 

  • पूर्वजों के साथ हमारे  संबंधों की व्याख्या निम्नलिखित प्रमाणों के आधार पर की जाती है जिसे हम Evidences of Organic Evolution  नाम से जानते हैं।

  1. शारीरिक प्रमाण (Anatomical Evidence)

  2. भ्रूण विज्ञान सम्बन्धी प्रमाण (Embryological Evidence)

  3. कार्लीकी प्रमाण (Physiological Evidence)

  4. भौगोलिक वितरण से प्रमाण (Evidence from Geographic Distribution)

  5. जीवाश्म विज्ञान का प्रमाण (Evidence from Paleontology) 

  6. आनुवांशिकी से प्रमाण (Evidence from Heredit)

  7. वर्गीकरण का प्रमाण (Evidence from Taxonomy)

  8. जीव रसायनी से प्रमाण (Evidence from Bio - Chemistry)

 

  • जैव वैज्ञानिकों के अनुसार जीवन की उत्पत्ति समुद्र के तल में लगभग  चार अरब वर्ष पहले हुई थी, उस काल को आर्कियोलॉजिकल युग या प्रीकैम्ब्रयन कहा जाता है। 

  • इटालियन विद्वान् "लियोनार्डो दा विन्ची" को जीवाश्म विज्ञान (Paleontology) का जन्म दाता माना जाता है परन्तु "जॉर्जिस कुमियर" को आधुनिक जीवाश्म विज्ञान का जन्मदाता माना जाता है। 

  • स्तनधारियों की उत्पत्ति सिवोजोइक युग में लगभग 70 मिलियन वर्ष पहले हुआ था। 

  • मौलिक रूप से सामान अंगों जिनमें Blood एवं Nerve Supplies समान हो, भ्रूणीय उत्पत्ति एवं विकास समान हो, भले ही उनके कार्य और रचना भिन्न - भिन्न हों, समजात अंग कहलाता है (Homologous Organ)।

  • समजात अंग के कुछ उदाहरण हैं :- मेंढक, छिपकली, कबूतर, व्हेल, चमगादड़, घोड़ा तथा मनुष्यों की अगली टांग

  • वैसे अंग जिनके कार्य सामान हो  पर रचना एवं उत्पत्ति भिन्न - भिन्न  हो समरूप अंग (Analogous Organ) कहलाते हैं।

  • समरूप अंग के कुछ उदाहरण हैं :- कीटों, सरीसृपों, पक्षियों एवं चमगादड़ के पंख, मधुमक्खी एवं बिच्छू के डंक इत्यादि।

  • ऐसे अंग जो जीवों के पूर्वजों में पूर्ण विकसित होते हैं, परन्तु वातावरणीय परिस्थितियों में बदलाव से इनका महत्व समाप्त हो जाने के कारण विकास क्रम में इनका क्रमिक लोप होने लगता है, ये अवशोषी अंग कहलाते हैं। 

  • मनुष्य के शरीर में लगभग 180 अवशोषी अंगों में से कुछ के उदाहरण निम्न है :- कर्ण पल्ल्व (Ear Pinna) , त्वचा के बाल, अपेंडिक्स, आँखों की निकटिटेटिंग झिल्ली, पुच्छ कशेरुक (Caudal Vertebrae) ।

  • कुछ जीव दो संघों (Phylum) के बीच में सम्बन्ध को बतलाते हैं अर्थात इनमें दोनों के लक्षण पाए जाते हैं, योजक कड़ी कहलाता है।

  • जैसे :- युग्लीना पौधों एवं जंतु प्रोटोजोआ के बीच की योजक कड़ी है क्यूंकि यह पौधों के समान प्रकाश संश्लेषण करते हैं। 

  • परिपेटस :- ऐनेलिडा एवं आर्थोपोडा के बीच की कड़ी है। 

  • एकिडना :- सरीसृप एवं स्तनधारियों के बीच की कड़ी है। 

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