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आनुवांशिकी (Genetics)

  • विज्ञान की वह शाखा जिसमें हम माता पिता तथा संतान के समान या आसमान गुणों का अध्ययन करते है, आनुवांशिकी (Genetics) कहलाता है, तथा संतति में पैतृक लक्षणों के संचरण (Transmission) को आनुवांशिकता (Heredity) कहते हैं।

  • आनुवांशिकता के नियमों का अध्ययन ऑस्ट्रिया में ब्रन (Brunn) नामक स्थान पर ग्रेगर जोहान मेण्डल ने किया था।

  • इसी कारण से मेण्डल को आनुवांशिकता का पिता (Father of Genetics) भी कहा जाता है।

  • Genetics शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम डब्ल्यू वाटसन ने 1905 में किया था।

  • जीन (Gene) का पता सर्वप्रथम मेण्डल ने ही लगाया था, परन्तु जीन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जोहन्सन ने 1909 में किया था।

  • Gene D.N.A का बना होता है। आधुनिक अनुसंधानों के आधार पर Gene को क्रियात्मक पद के आधार पर तीन उपभागों में बांटा जाता है - Muton, Recon एवं Cistron .

 

मेण्डल के नियम (Laws of Mendel) 

  • 1866 में मेण्डल द्वारा प्रतिपादित नियमों का प्रकाशन Natural History के Society of Brunn पत्रिका में किया गया था।

  • परन्तु इसके नियमों की पुष्टि 1900 में Hugo de vries (Holland), Correns (Germany) एवं Tschermake (Austria) द्वारा किया गया।

  • इन्होने मेण्डल की स्मृति में इन विषयों को Laws of Mendelian Inheritance कहा।

  • अपने नियमों के प्रयोग के लिए मेण्डल ने अपने बगीचे के मटर के पौधों का चुनाव किया।

  • इसलिए मेण्डल द्वारा प्रयोग के लिए चुने गए मटर को Garden Peas कहा जाता है।

 

मेण्डल के अनुसन्धान में प्रयुक्त कुछ टेक्निकल शब्द निम्न हैं :-

  1. Allelomorphic Characters :- जीवों में स्थित विपरीत गुणों के जोड़ों को  Allelomorphic Characters कहते हैं, जैसे - लम्बा तथा नाटा, लाल और सफेद फूल इत्यादि।

  2. प्रभावी गुण (Dominant Characters) :- संकरण के उपरान्त पहली पीढ़ी में विपरीत गुणों के जोड़ों में से जो लक्षण रहते हुए प्रत्यक्ष हों उन्हें प्रभावी गुण कहते हैं। 

  3. अप्रभावी गुण (Recessive Characters) :- संकरण के उपरान्त पहली पीढ़ी में विपरीत गुणों के जोड़ों में जो लक्षण रहते हुए प्रत्यक्ष न हों, उन्हें अप्रभावी गुण कहते हैं।

  4. समलक्षणी (Phenotype) :- जीवधारी के जो लक्षण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई पढ़े हैं उन्हें Pehnotype कहते हैं।

  5. समजीनि (Genotype) ;- जिन जीवों में जीन की संरचना एक समान हो उन्हें Genotype कहते हैं।

 

मेण्डल के नियम -

मेण्डल के तीन नियम इस प्रकार है :

 

प्रभाविकता का नियम (Law of Dominance) :- 

  • एक जोड़ा विपर्यायी गुणों वाले शुद्ध पिता या माता में संकरण करने से पीढ़ी में प्रभावी गुण प्रकट होते हैं, जिनके अप्रभावी गुण छिप जाते हैं।

  • प्रथम पीढ़ी में केवल प्रभावी गुण ही दिखाई देते हैं लेकिन अप्रभावी गुण उपस्थित अवश्य रहते हैं। यह गुण दूसरी पीढ़ी में प्रकट होते हैं। 

  • जैसे  - शुद्ध लम्बे पौधे को शुद्ध बौने पौधे के साथ Cross कराया जाता है तो प्रथम पीढ़ी में सभी पौधे लम्बे प्राप्त होते हैं।

 

पृथक्करण का नियम (Law  of Segregation) :-

  • जब दो विपरीत गुण वाले, एक जोड़े जिनके बीच संकरण कराया जाता है तो युग्मक निर्माण के समय दोनों पृथक हो जाते है और इनमें से केवल एक गुण ही किसी एक युग्मक में पहुँचता है।

  • इसे युग्मकों की शुद्धता का नियम भी कहा जाता है।

 

स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) :-

  • जो दो जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो दोनों लक्षणों का पृथक्करण स्वतंत्र रूप से होता है - एक लक्षण की वंशागति दूसरे को प्रभावित नहीं करती।