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कोशिका भित्ति (Cell Wall)

  • यह केवल पादप कोशिका में पाया जाता है। 

  • यह सेलूलोज़ का बना होता है। 

  • पौधों के Cell Wall में Hemicellulose एवं Pectic Acid भी पाया जाता है। 

  • जीवाणु (Bacteria) के Cell wall  में protein - lipid - polysaccharides के संयुक्त यौगिक रहते हैं। 

  • यह कोशिका की निश्चित आकार प्रदान करता है। 

कोशिका झिल्ली (Cell Membrane)

  • Cell membrane एक जीवित, लचीली, छिद्रयुक्त, अर्धपारगम्य (semipermeable), चयनात्मक (Selective) एवं अत्यंत ही पतली झिल्ली होती है। 

  • झिल्ली को सर्वप्रथम Nagelei और Cramer ने  1855 में देखा था जिसकी पुष्टि  E. Overton (1899) ने की । 

  • इस झिल्ली में  7 ऐंगस्ट्रम (Å) व्यास वाले अनेक छिद्र मौजूद होते हैं। 

  • झिल्ली की मोटाई 75 Å होती है। 

  • यह झिल्ली वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के अलावे सीथालिक अम्ल इत्यादि की होती है। 

  • इस झिल्ली की रचना के सम्बन्ध में रॉबर्ट्सन (Robertson) ने यूनिट मेम्ब्रेन मॉडल तथा सिंगर एवं नीकॉलसन ने तरल मोजैक सिद्धांत दिया था। 

  • यह झिल्ली कोशिका को बाहरी सुरक्षा देने साथ ही साथ पदार्थों को कोशिका के अंदर एवं बाहर आने  - जाने में सहायता  प्रदान करता है। 

 

तारककाय (Centrosome)

 

  • इसकी खोज सर्वप्रथम बावेरी ने की थी। 

  • यह सिर्फ जंतु कोशिका में पाया जाता है। 

  • इसके भीतर दो छोटी बेलनाकार रचनाएं पायी जाती हैं जिन्हें सेन्ट्रियोल कहते हैं। 

  • कोशिका विभाजन के समय इससे तारक (Astral) किरणें निकलती हैं। 

अन्तः प्रद्रव्ययी जालिका (Endoplasmic Reticulum)

 

  • इसे Ergastoplasm भी कहा जाता है। 

  • इसकी खोज सर्वप्रथम K.R. Porter ने किया था। 

  • जब इसकी सतह पर राइबोसोम के कण उपस्थित रहते हैं तो उसे रुखड़ा (rough) एवं जब राइबोसोम के कण अनुपस्थित होते हैं तो इसे चिकना (smooth) कहते हैं। 

  • यह वसा एवं प्रोटीन के संश्लेषण में सहायता करता है। 

 

राइबोसोम (Ribosome)

  • इसे सर्वप्रथम ब्राउन एवं रॉबिंसन ने 1953 में पादप कोशिका में तथा जी. ई. पैलार्ड ने जंतु कोशिका में देखा था। 

  • यह राइबोन्यूक्लियो प्रोटीन के बने होते हैं। 

  • यह दो प्रकार का होता है - 70 S एवं 80 S, 70 S प्रोकैरियोटिक कोशिका में एवं 80 S यूकैरियोटिक कोशिका में पाया जाता है। 

  • यह प्रोटीन उत्पादन का स्थल है अतः इसे प्रोटीन की फैक्ट्री भी कहते हैं। 

माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria)

  • इसकी खोज सर्वप्रथम कॉलिकर ने 1850 में रेखित पेशी की कोशिकाओं में किया था, ऑल्टमैन ने इसे Bioplast नाम दिया था।

  • वेंडा ने इसे माइटोकॉन्ड्रिया नाम दिया था। 

  • कोशिका में इसकी संख्या सामान्यतः 500 से 2000 तक होती है। 

  • माइटोकॉन्ड्रिया के भीतरी भाग में अंगुलीनुमा रचना पायी जाती है जिसे क्रिस्टी कहते हैं। 

  • यह कोशकीय श्वसन का सक्रिय स्थल है अतः इसे कोशिका ऊर्जा का घर (Power House of the cell) कहते हैं। 

 

गॉल्जीकाय (Golgi Complex)

 

  • सर्वप्रथम इटली के तंत्रिका विज्ञानी (Neurologist) कैमिलियो गॉल्जी ने बार्न उल्लू के तंत्रिका कोशिका में गॉल्जिकाय की खोज की थी। 

  • Plant cell एवं Invertebrates कोशिकाओं में यह छोटी - छोटी  रचनाओं के रूप में कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते हैं।  इन्हें Dictyosomes कहते हैं। 

  • यह सूक्ष्म नलिकाओं एवं थैलियों का बना होता है। 

  • गॉल्जिकाय को कोशिका के अणुओं का यातायात प्रबंधक भी कहा जाता है क्यूंकि कोशिका से स्रावित होने वाले पदार्थों को यह बाहर निकालने में सहायक होता है। 

  • यह कोशिका भित्ति एवं लाइसोसोम के निर्माण में भी सहायक होता है। 

 

लाइसोसोम (Lysosome)

  • इसे सर्वप्रथम 1955 में क्रिश्चियन डी. डूबे (De - Duve) ने देखा था। 

  • इसके भीतर कुल 24 प्रकार के एन्जाइम पाए जाते हैं जिन्हें हाइड्रोलाइटिक एन्जाइम कहा जाता है। 

  • इसका सबसे प्रमुख कार्य बाहरी पदार्थों का भक्षण एवं पाचन करना है। 

  • पाचन के दौरान फट जाने पर इसके एन्जाइम कोशिका में फैलकर उसे नष्ट करने लगते हैं, इसी कारण लाइसोसोम को आत्महत्या की थैली भी कहा जाता है। 

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